गुजरात फिर बना ‘बाघ पर्यावास वाला राज्य’
गुजरात के लिए वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की गई है। नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (NTCA) ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि की है कि गुजरात ने ‘बाघों वाले राज्य’ (Tiger State) का अपना पुराना दर्जा फिर से हासिल कर लिया है। राज्य के दाहोद जिले में स्थित रतनमहल वाइल्डलाइफ सैंक्चुरी में एक बाघ के स्थायी रूप से बसने के प्रमाण मिलने के बाद यह घोषणा की गई है।
तीन दशकों का लंबा इंतजार हुआ खत्म
गुजरात में बाघों का इतिहास उतार-चढ़ाव भरा रहा है। राज्य वन विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार:
- अंतिम गणना: राज्य में बाघों की आखिरी आधिकारिक मौजूदगी 1989 में दर्ज की गई थी, जब केवल पगमार्क (पैरों के निशान) मिले थे।
- दर्जा खोना: 1989 के बाद कोई बाघ न दिखने के कारण, 1992 की गणना के बाद गुजरात को राष्ट्रीय बाघ पर्यावास की सूची से बाहर कर दिया गया था।
- पुनरागमन: अब, तीन दशकों से अधिक समय के बाद, NTCA ने राज्य को फिर से ‘बाघ समष्टि’ (Tiger Habitat) वाले राज्यों में शामिल किया है।
गुजरात: ‘बिग थ्री’ वाला देश का एकमात्र राज्य
इस नई पुष्टि के साथ ही गुजरात ने एक अनोखा वैश्विक और राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया है। यह अब भारत का एकमात्र राज्य बन गया है जहाँ प्रकृति की तीन सबसे प्रमुख ‘बड़ी विडाल’ (Big Cat) प्रजातियां एक साथ रहती हैं:
- एशियाई शेर (Asiatic Lion): जिसके लिए गुजरात का गिर पहले से ही विश्व प्रसिद्ध है।
- बाघ (Tiger): जिसकी रतनमहल में वापसी हुई है।
- तेंदुआ (Leopard): जो राज्य के विभिन्न वनों में बहुतायत में पाए जाते हैं।
रतनमहल बना नया ठिकाना
दाहोद जिले का रतनमहल वन्यजीव अभयारण्य अब बाघों के संरक्षण के नए केंद्र के रूप में उभरा है। वन अधिकारियों का मानना है कि पड़ोसी राज्यों (जैसे मध्य प्रदेश या राजस्थान) से बाघों के प्रवास और यहाँ के अनुकूल वातावरण ने इस वापसी को संभव बनाया है। राज्य सरकार अब इस क्षेत्र में बाघों की सुरक्षा और उनके अनुकूल पारिस्थितिकी तंत्र को और मजबूत करने के लिए विशेष कार्ययोजना तैयार कर रही है।


