WTO-विकास के लिए निवेश सुविधा (IFD)
26 से 29 मार्च 2026 तक कैमरून के याउंडे (Yaoundé) में विश्व व्यापार संगठन (WTO) का 14वां मंत्रिस्तरीय सम्मेलन (MC14) आयोजित किया जा रहा है। इस सम्मेलन में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल कर रहे हैं।
मुख्य एजेंडा और चर्चा के विषय
सम्मेलन के दौरान निम्नलिखित महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की जा रही है:
- WTO सुधार: संगठन की कार्यप्रणाली में सुधार लाना।
- ई-कॉमर्स कार्य कार्यक्रम और स्थगन (Moratorium): डिजिटल व्यापार पर शुल्कों से संबंधित नीतियां।
- मत्स्य पालन सब्सिडी (Fisheries Subsidies): समुद्री संसाधनों के संरक्षण और छोटे मछुआरों के हितों की रक्षा।
- कृषि और विकास: खाद्य सुरक्षा और सार्वजनिक स्टॉकहोल्डिंग (PSH) जैसे मुद्दे।
- विकास के लिए निवेश सुविधा (Investment Facilitation for Development: IFD): विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) के प्रवाह को सुगम बनाना।
विकास के लिए निवेश सुविधा (IFD) क्या है?
यह चीन के नेतृत्व वाला समझौता है जिसका उद्देश्य विकासशील और अल्पविकसित देशों (LDCs) में निवेश के माहौल को बेहतर बनाना है।
- इसका मुख्य ध्यान विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) पर है।
- यह प्रशासनिक बाधाओं को कम करने और अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने पर केंद्रित है।
- इसे मराकेश समझौते (1995) में शामिल करने का प्रस्ताव है, जिससे यह WTO के कानूनी ढांचे का हिस्सा बन सके।
भारत का रुख और विरोध के कारण
भारत और दक्षिण अफ्रीका इस समझौते के प्रमुख विरोधियों में से हैं। भारत के विरोध के मुख्य तर्क निम्नलिखित हैं:
- बहुपक्षवाद बनाम बहुपक्षीय (Multilateralism vs Plurilateral):भारत का मानना है कि WTO के निर्णय आम सहमति (Consensus) पर आधारित होने चाहिए, जहाँ हर सदस्य की आवाज समान हो। IFD एक ‘प्लूरिलैटरल’ (बहुपक्षीय समूह) समझौता है, जो केवल हस्ताक्षर करने वाले देशों पर लागू होता है। भारत को डर है कि ऐसे समझौतों से WTO का मूल ढांचा कमजोर होगा।
- नीतिगत स्वायत्तता (Policy Autonomy):भारत का तर्क है कि ऐसे समझौते विकासशील देशों की अपनी नीतियों को विनियमित करने की शक्ति को सीमित कर सकते हैं।
- चीन का प्रभाव:विशेषज्ञों का मानना है कि भारत इस समझौते को चीन के बढ़ते वैश्विक निवेश प्रभाव (जैसे बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव) को नियंत्रित करने के नजरिए से भी देख रहा है।
वर्तमान स्थिति (मार्च 2026)
- बढ़ता समर्थन: 166 WTO सदस्यों में से अब तक 128 सदस्य इस समझौते का समर्थन कर रहे हैं।
- तुर्की का रुख: हालिया रिपोर्टों के अनुसार, तुर्की ने इस समझौते पर अपनी आपत्ति हटा ली है, जिससे भारत अब इस मुद्दे पर काफी हद तक अकेला पड़ता दिख रहा है।
- भारत की मांग: पीयूष गोयल ने जोर दिया है कि WTO में कोई भी सुधार पारदर्शी, समावेशी और विकास को केंद्र में रखकर होना चाहिए।


