विश्व  मरुस्थलीकरण और सूखा रोकथाम दिवस 2026

संयुक्त राष्ट्र मरुस्थलीकरण रोकथाम अभिसमय (UNCCD) के तहत हर साल 17 जून को विश्व  मरुस्थलीकरण और सूखा रोकथाम दिवस (World Day to Combat Desertification and Drought) मनाया जाता है। यह दिन मरुस्थलीकरण, भूमि क्षरण और सूखे के खिलाफ जागरूकता बढ़ाने तथा कार्रवाई को बढ़ावा देने के लिए एक वैश्विक मंच के रूप में कार्य करता है। इस वर्ष यह दिवस “Rangelands: Recognize. Respect. Restore.” (चारागाह: पहचानें। सम्मान करें। पुनर्बहाल करें।) विषय (थीम) के साथ मनाया गया।

बॉन चैलेंज और भारत की प्रतिबद्धता

केंद्रीय पर्यावरण मंत्री ने घोषणा की कि भारत ने बॉन चैलेंज के तहत 2030 तक 26 मिलियन हेक्टेयर भूमि को बहाल करने के अपने लक्ष्य के मुकाबले 21.76 मिलियन हेक्टेयर भूमि को पहले ही बहाली के प्रयासों के दायरे में ला दिया है। उन्होंने कहा कि UNCCD के एक पक्षकार के रूप में भारत ने लगातार सतत भूमि प्रबंधन को आगे बढ़ाया है।

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने 2030 तक 26 मिलियन हेक्टेयर बंजर और वनों की कटाई वाली भूमि को बहाल करने की भारत की प्रतिबद्धता की घोषणा की थी, जो दुनिया की सबसे बड़ी बहाली प्रतिबद्धताओं में से एक है।

बॉन चैलेंज (Bonn Challenge) 2011 में शुरू की गई एक वैश्विक पहल है जिसका उद्देश्य खराब और कटे हुए वनों की परिदृश्य को बहाल करना है, और इसके तहत 2030 तक 350 मिलियन हेक्टेयर भूमि को बहाली के दायरे में लाने का लक्ष्य रखा गया है।

प्रमुख योजनाएं और उपलब्धियां

केंद्रीय मंत्री ने साझा किया कि प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के वॉटरशेड विकास घटक के तहत 27 मिलियन हेक्टेयर से अधिक भूमि का उपचार किया गया है और 61.3 मिलियन से अधिक जियो-टैग की गई प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन संपत्तियां बनाई गई हैं।

‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान: प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के इस अभियान का उल्लेख करते हुए श्री यादव ने कहा कि देश भर में 266 करोड़ से अधिक पौधे लगाए गए हैं।

वैज्ञानिक निगरानी: उन्होंने विज्ञान-आधारित योजना और निगरानी को सक्षम बनाने में भुवन (Bhuvan), वेदास (VEDAS) और युक्तधारा (Yuktdhara) जैसे प्लेटफॉर्मों की भूमिका पर भी प्रकाश डाला।

मंत्री ने कहा कि अरावली ग्रीन वॉल इनिशिएटिव (Aravalli Green Wall Initiative) एक महत्वपूर्ण परिदृश्य-स्तरीय बहाली कार्यक्रम के रूप में उभरा है और इसने वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान अपने वार्षिक लक्ष्यों को पार कर लिया है। उन्होंने यह भी बताया कि मिष्टी (MISHTI) कार्यक्रम के तहत 2028 तक 54,000 हेक्टेयर मैंग्रोव क्षेत्र को बहाल करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

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