“विकसित भारत – जी राम जी (VB-G RAM G) अधिनियम” 1 जुलाई, 2026 से लागू हुआ
दो दशक पुराने मनरेगा (MGNREGA) कानून की जगह ‘विकसित भारत – गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) [VB-G RAM G] अधिनियम, 2025’ को 1 जुलाई, 2026 से पूरे ग्रामीण भारत में आधिकारिक रूप से लागू कर दिया गया है।
इस ऐतिहासिक कानून का राष्ट्रीय शुभारंभ 2 जुलाई 2026 को आंध्र प्रदेश के तिरुपति जिले के ओबुलवारीपल्ले मंडल के मुक्कावारीपल्ली गांव में एक भव्य समारोह के दौरान किया जाएगा। इस योजना को मुख्य रूप से ‘विकसित भारत @2047’ के राष्ट्रीय विजन को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है, ताकि ग्रामीण रोजगार को टिकाऊ संपत्तियों के निर्माण से जोड़ा जा सके।
नए अधिनियम की मुख्य विशेषताएं और प्रावधान
सरकार ने इस मिशन के सुचारू संचालन और कामगारों के हितों की रक्षा के लिए कई कड़े और पारदर्शी नियम तय किए हैं:
- 125 दिनों के रोजगार की कानूनी गारंटी: इस अधिनियम के तहत अब प्रत्येक पात्र ग्रामीण परिवार को एक वित्तीय वर्ष में 125 दिनों के गारंटीकृत कुशल-रहित (unskilled) शारीरिक रोजगार का अधिकार मिलेगा। इससे पहले मनरेगा में यह सीमा 100 दिनों की थी।
- ₹300 की अंतरिम आधार मजदूरी: केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित नई मजदूरी दरों के तहत देश में पहली बार राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम में ₹300 प्रतिदिन की अंतरिम बेस वेज रेट (आधार मजदूरी) तय की गई है। यानी देश के किसी भी हिस्से में अब दैनिक मजदूरी ₹300 से कम नहीं होगी।
- 15 दिनों के भीतर काम या बेरोजगारी भत्ता: काम के लिए आवेदन करने की तारीख से 15 दिनों के भीतर प्रशासन को रोजगार देना अनिवार्य होगा। यदि तय समय सीमा में रोजगार नहीं दिया जाता है, तो संबंधित राज्य सरकार को आवेदक को बेरोजगारी भत्ता देना होगा।
मजदूरी भुगतान और मुआवजे के कड़े नियम
भ्रष्टाचार को रोकने और कामगारों के अधिकारों को सुनिश्चित करने के लिए भुगतान प्रणाली को बेहद पारदर्शी और डिजिटल बनाया गया है:
- डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT): कामगारों की मजदूरी सीधे उनके बैंक खातों या पोस्ट ऑफिस खातों में डीबीटी के जरिए भेजी जाएगी।
- समय पर भुगतान: मस्टर रोल बंद होने के बाद साप्ताहिक आधार पर या किसी भी स्थिति में 15 दिनों के भीतर भुगतान करना अनिवार्य होगा।
- देरी पर मुआवजा: यदि मस्टर रोल बंद होने के 15 दिनों के भीतर मजदूरी नहीं मिलती है, तो श्रमिक 0.05% प्रतिदिन की दर से देरी के मुआवजे (Delay Compensation) के हकदार होंगे।
काम की दूरी और अतिरिक्त भत्ता
नियमों के अनुसार, श्रमिकों को उनके गांव के 5 किलोमीटर के दायरे में ही रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा। यदि किसी परिस्थिति में काम 5 किमी से अधिक दूरी पर (परंतु ब्लॉक के भीतर) दिया जाता है, तो श्रमिकों को परिवहन और रहने के खर्च के लिए मजदूरी दर का 10% अतिरिक्त भुगतान किया जाएगा।
प्रशासनिक ढांचा
इस योजना के क्रियान्वयन के लिए राज्य सरकारों द्वारा नामित जिला कलेक्टर (या समकक्ष अधिकारी) को ‘जिला कार्यक्रम समन्वयक’ (DPC) के रूप में जिम्मेदारी सौंपी जाएगी।
फंड शेयरिंग पैटर्न
योजना के लिए केंद्र और राज्यों के बीच फंड शेयरिंग (वित्त पोषण) का अनुपात इस प्रकार निर्धारित किया गया है:
| राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों की श्रेणी | केंद्र : राज्य का हिस्सा |
| पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्य | 90 : 10 |
| अन्य राज्य और विधानसभा वाले केंद्र शासित प्रदेश | 60 : 40 |
| बिना विधानसभा वाले केंद्र शासित प्रदेश | 100% (पूर्णतः केंद्र पोषित) |
अति-महत्वपूर्ण: राज्य सरकारों को इस अधिनियम के प्रारंभ होने के बाद निर्धारित समय सीमा के भीतर इस कानून के प्रावधानों के अनुरूप अपनी स्थानीय योजनाओं को अधिसूचित करना अनिवार्य कर दिया गया है।
Source: PIB
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