चेंचु आदिवासियों ने अमराबाद टाइगर रिज़र्व से ज़बरन विस्थापन का विरोध किया

तेलंगाना के नल्लामाला जंगलों के चेन्चू जनजाति के सदस्यों ने 17 अप्रैल, 2026 को मुख्यमंत्री को याचिकाएँ सौंपीं। ये याचिकाएँ नागरकुरनूल जिले के अमराबाद टाइगर रिजर्व से उन्हें विस्थापित करने के लिए वन विभाग द्वारा अपनाए जा रहे तरीकों के खिलाफ दी गई हैं।

मुख्य विवरण:

  • प्राचीन जनजाति: चेन्चू भारत की सबसे पुरानी खाद्य संग्राहक (food gatherer) जनजातियों में से एक हैं, जो सदियों से इन जंगलों में रह रही हैं।
  • PVTG वर्गीकरण: इन्हें ‘विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह’ (Particularly Vulnerable Tribal Group – PVTG) के रूप में वर्गीकृत किया गया है। वे जीवित रहने के लिए पूरी तरह से वन संसाधनों पर निर्भर हैं।
  • पारिस्थितिक ज्ञान: उनके पास अपने पारिस्थितिकी तंत्र की गहरी समझ है और वे लंबे समय से अपने सांस्कृतिक महत्व के लिए पहचाने जाते रहे हैं।
  • अमराबाद टाइगर रिजर्व: नल्लामाला वन क्षेत्र का हिस्सा यह रिजर्व अपनी समृद्ध जैविक विविधता के लिए प्रसिद्ध है, जहाँ वनस्पतियों और जीवों की कई स्थानिक (endemic) प्रजातियाँ पाई जाती हैं। 

संघर्ष का मूल कारण:चेन्चू समुदाय का आरोप है कि वन विभाग उन्हें उनके पैतृक निवास स्थान से हटाने के लिए दबाव बना रहा है। जबकि कानूनन, टाइगर रिजर्व के मुख्य क्षेत्रों से विस्थापन स्वैच्छिक होना चाहिए, न कि जबरन। चेन्चू लोगों का तर्क है कि वे जंगल के संरक्षक हैं और उनका अस्तित्व इस पर्यावरण से अटूट रूप से जुड़ा हुआ है।

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