राज्य वित्त आयोगों के लिए डेटासेट पर समिति की रिपोर्ट

भारत सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार ने आज ‘राज्य वित्त आयोगों के लिए डेटासेट पर समिति’ की रिपोर्ट जारी की। यह रिपोर्ट केंद्रीय पंचायती राज मंत्रालय द्वारा तैयार की गई है। राज्य वित्त आयोगों के लिए डेटासेट पर आई यह रिपोर्ट राजकोषीय, जनसांख्यिकीय, शासन, बुनियादी ढांचे और सेवा वितरण के आयामों में राज्य वित्त आयोगों (SFCs) द्वारा आवश्यक महत्वपूर्ण डेटासेट की पहचान करती है।

अपनी मुख्य सिफारिशों के तहत, समिति ने निम्नलिखित प्रस्ताव दिए हैं:

  • पंचायत-स्तरीय राजकोषीय डेटाबेस का विकास।
  • SFC के उपयोग के लिए पंचायत उन्नति सूचकांक (Panchayat Advancement Index) संकेतकों का वर्गीकरण।
  • राज्य सरकारों के भीतर विशेष राज्य वित्त आयोग प्रकोष्ठों (Cells) की स्थापना।
  • लेखांकन ढांचे का मानकीकरण।
  • SFC के लिए एक सामान्य रिपोर्टिंग ढांचे को अपनाना।
  • व्यापक डेटा हैंडबुक का प्रकाशन।
  • भावी आयोगों की सहायता के लिए एक ‘राज्य वित्त आयोग मैनुअल’ तैयार करना।

रिपोर्ट में सिफारिश की गई है कि भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) को पंचायती राज संस्थाओं को कार्यात्मक, वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार हस्तांतरित करने की सीमा का आकलन करने के लिए राज्यों में 73वें संवैधानिक संशोधन के कार्यान्वयन का प्रदर्शन ऑडिट (performance audit) करना चाहिए।

राज्य वित्त आयोग

संविधान के अनुच्छेद 243-I के तहत राज्यपाल द्वारा गठित राज्य वित्त आयोग को, पंचायती राज संस्थाओं की वित्तीय स्थिति का आकलन करने और स्थानीय सरकारों को राजकोषीय हस्तांतरण के सिद्धांतों की सिफारिश करने का कार्य सौंपा गया है।

अनुच्छेद 243-I के अनुसार, राज्य का राज्यपाल, 73वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 के प्रारंभ से एक वर्ष के भीतर और उसके बाद प्रत्येक पांचवें वर्ष की समाप्ति पर, पंचायतों की वित्तीय स्थिति की समीक्षा करने और राज्यपाल को निम्नलिखित सिद्धांतों के संबंध में सिफारिशें करने के लिए एक वित्त आयोग का गठन करेगा:

(क) राज्य द्वारा वसूले जाने वाले करों, शुल्कों, टोल और फीस के निवल आय का राज्य और पंचायतों के बीच वितरण; 

(ख) वे कर, शुल्क, टोल और फीस जो पंचायतों को सौंपे जा सकते हैं या पंचायतों द्वारा विनियोजित किए जा सकते हैं, उनका निर्धारण; 

(ग) राज्य की संचित निधि से पंचायतों को सहायता अनुदान (grants-in-aid)।

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