नोवो नॉर्डिस्क इंडिया ने डायबिटीज के लिए सप्ताह में एक बार ली जाने वाली पहली ‘अविकली’ लॉन्च की

नोवो नॉर्डिस्क इंडिया ने 9 जुलाई को Awiqli (इंसुलिन आइकोडेक) लॉन्च किया। इसके साथ ही भारत उन प्रारंभिक देशों में शामिल हो गया है, जहाँ टाइप 1 और टाइप 2 डायबिटीज वाले वयस्कों के लिए दुनिया का पहला ‘सप्ताह में एक बार’ लगने वाला बेसल इंसुलिन उपलब्ध है।

यह थेरेपी इंसुलिन इंजेक्शन की संख्या को साल में 365 (रोज़ाना एक) से घटाकर 52 (हफ्ते में एक) कर देती है, जिससे इलाज को सही ढंग से अपनाने और मरीज़ों की सुविधा में सुधार हो सकता है।

Awiqli (इंसुलिन आइकोडेक) लंबे समय तक असर करने वाला बेसल इंसुलिन है, जिसे केवल एक इंजेक्शन से पूरे सप्ताह ब्लड ग्लूकोज को स्थिर रखने के लिए बनाया गया है।

ONWARDS-1 ग्लोबल क्लिनिकल प्रोग्राम के परिणामों से पता चला कि रोजाना लगने वाले इंसुलिन ग्लार्गिन U100 की तुलना में Awiqli ने HbA1c लेवल को अधिक कम किया और ‘टाइम इन रेंज’ (TIR) ​​में सुधार किया।

स्टडी में यह भी पाया गया कि टाइप 2 डायबिटीज वाले अधिक लोगों ने हाइपोग्लाइसीमिया (ब्लड शुगर का बहुत कम होना) का अनुभव किए बिना 7% से कम HbA1c लेवल हासिल किया, जो बेहतर ग्लाइसेमिक कंट्रोल को दिखाता है।

बेहतर ‘टाइम इन रेंज’ (TIR) ​​का मतलब है कि मरीजों का ब्लड ग्लूकोज लेवल अधिक समय तक तय टारगेट रेंज में रहा, जिससे दिन के दौरान उतार-चढ़ाव कम हुए।

Awiqli का सबसे आम साइड इफ़ेक्ट हाइपोग्लाइसीमिया (ब्लड ग्लूकोज़ लेवल का कम होना) है, जो लगभग हर दस में से एक मरीज को हो सकता है।

कुछ जानकारों के मुताबिक, टाइप 1 डायबिटीज वाले लोगों को आम तौर पर दैनिक लगने वाले बेसल इंसुलिन की तुलना में इंसुलिन आइकोडेक के साथ अधिक बार हाइपोग्लाइसीमिया का अनुभव हो सकता है, इसलिए सावधानी से निगरानी की जरूरत होती है।

यह लॉन्च डायबिटीज मैनेजमेंट में एक बड़ी प्रगति है क्योंकि यह इंसुलिन लेने का एक ऐसा तरीका देता है जिसमें कम परेशानी होती है, हालाँकि सही मरीज़ का चुनाव और क्लिनिकल देखरेख अब भी ज़रूरी है।

CLICK HERE: UPSC PRELIMS & MAINS CURRENT AFFAIRS BASED WEEKLY TEST (ENG & HINDI)

CLICK HERE FOR GS TIMES PRAHAR UPSC GS MAINS TEST SERIES 

CLICK HERE: DAILY CURRENT AFFAIRS QUIZ (FOR ALL EXAMINATIONS)

error: Content is protected !!