भारत और इंडोनेशिया ने सबांग बंदरगाह को संयुक्त रूप से विकसित करने के लिए समझौते पर हस्ताक्षर किए
भारत और इंडोनेशिया ने इंडोनेशिया के सुमात्रा द्वीप के उत्तरी छोर पर रणनीतिक रूप से स्थित सबांग बंदरगाह (Sabang Port) को संयुक्त रूप से विकसित करने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते के माध्यम से, दोनों पक्षों का लक्ष्य हिंद-प्रशांत (इंडो-पैसिफिक) क्षेत्र में समुद्री सहयोग को मजबूत करना और भारत को दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री मार्गों में से एक (मलक्का) के निकट रणनीतिक प्रभाव प्रदान करना है।
यह बंदरगाह भारत के आगामी ग्रेट निकोबार ट्रांसशिपमेंट पोर्ट से लगभग 160 किलोमीटर दूर स्थित है और यहाँ से मलक्का जलडमरूमध्य (Strait of Malacca) पर नजर रखी जा सकती है, जहाँ से वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा गुजरता है।
मलक्का जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री चोकपॉइंट्स (chokepoints) में से एक है। चीन के लिए यह एक जीवन रेखा की तरह है, क्योंकि उसके कच्चे तेल के आयात का लगभग 80 प्रतिशत और मात्रा के हिसाब से उसके व्यापारिक व्यापार का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा इसी संकरे जलमार्ग से होकर गुजरता है।
सुमात्रा और प्रायद्वीपीय मलेशिया के बीच स्थित मलक्का जलडमरूमध्य, अंडमान सागर (हिंद महासागर) और दक्षिण चीन सागर (प्रशांत महासागर) को जोड़ने वाले एक महत्वपूर्ण जलमार्ग के रूप में कार्य करता है।
भारत के लिए, सबांग परियोजना उसके ग्रेट निकोबार ट्रांसशिपमेंट पोर्ट की पूरक है, जो मलक्का जलडमरूमध्य के उत्तरी प्रवेश द्वार के दोनों ओर भारत को एक रणनीतिक उपस्थिति प्रदान करती है।
सबांग परियोजना से अंडमान और निकोबार द्वीप समूह तथा इंडोनेशिया के आचे (Aceh) प्रांत के बीच समुद्री संपर्क में सुधार करके भारत की ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ (Act East Policy) को और मजबूती मिलने की संभावना है।
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