हिमालयन वाटर पार्टनरशिप

पूर्वोत्तर के सभी आठ राज्यों ने क्षेत्र के करोड़ों लोगों के लिए  के मुख्य स्रोत—पर्वतीय झरनों (mountain springs) का मानचित्रण (मैपिंग), संरक्षण और उन्हें पुनर्जीवित करने के लिए 17 जून 2026 को हिमालयन वाटर पार्टनरशिप (Himalayan Water Partnership) का गठन किया है। इस साझेदारी के तहत अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, सिक्किम और त्रिपुरा के अधिकारी, शोधकर्ता, समुदाय के नेता और नागरिक समाज समूह एक साथ आए हैं।

टाटा ट्रस्ट्स (Tata Trusts) की एक पहल ‘सेंटर फॉर माइक्रोफाइनेंस एंड लाइवलीहुड’ द्वारा सुगम बनाए गए इस मंच का उद्देश्य पूर्वी हिमालय में स्प्रिंग्सशेड (झरना क्षेत्र) प्रबंधन में सुधार करना है, जहाँ कई ग्रामीण और अर्ध-शहरी (peri-urban) समुदाय पीने के पानी, सिंचाई और घरेलू उपयोग के लिए झरनों पर निर्भर हैं।

साझेदारी के मुख्य कार्य और उद्देश्य:

  • साझा कार्यप्रणाली और इन्वेंट्री: यह साझेदारी झरनों की निगरानी के लिए एक सामान्य प्रोटोकॉल (कार्यप्रणाली), एक साझा क्षेत्रीय स्प्रिंग इन्वेंट्री (झरनों की सूची), सहयोगात्मक अनुसंधान और समुदाय के नेतृत्व वाली निगरानी पर काम करेगी।
  • नीतिगत सुधार और वित्तीय सहायता: इसका उद्देश्य राज्यों को अपनी जल नीतियों में स्प्रिंग्सशेड प्रबंधन को शामिल करने में मदद करना है। इसके साथ ही, ग्रामीण जल आपूर्ति और जलसंभर (वाटरशेड) विकास कार्यक्रमों के माध्यम से झरनों के कायाकल्प (rejuvenation) के लिए समर्पित फंड सुरक्षित करना भी इसका लक्ष्य है।

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