भारत ने 5 लाख मानव अंगदान संकल्पों की बड़ी उपलब्धि हासिल की
देश में मानव अंग और ऊतक (टिशू) दान को लेकर जागरूकता, करुणा और सामूहिक प्रतिबद्धता का एक नया कीर्तिमान स्थापित हुआ है। भारत में अब तक 5 लाख से अधिक लोगों ने अंग दान करने का संकल्प (प्लेज) लिया है। यह उपलब्धि इस बात को रेखांकित करती है कि आम जनता के बीच अंग दान को मानवता के एक उत्कृष्ट कार्य के रूप में देखा जा रहा है, जो प्रत्यारोपण (ट्रांसप्लांट) का इंतजार कर रहे मरीजों को एक नया जीवन और उम्मीद देता है।
कानूनी ढांचा और राज्यों की भूमिका भारत सरकार ने अंग और ऊतक दान के नियमन, भंडारण और व्यावसायिक खरीद-बख्त को रोकने के लिए ‘मानव अंग प्रत्यारोपण अधिनियम, 1994’ लागू किया था, जिसमें साल 2011 में संसद द्वारा संशोधन किया गया था। चूंकि स्वास्थ्य राज्य सूची का विषय है, इसलिए इस अधिनियम को अपने यहाँ प्रभावी बनाने के लिए राज्यों द्वारा इसे अपनाया जाना अनिवार्य है। अस्पतालों को अंग प्रत्यारोपण की अनुमति देने का अधिकार संबंधित राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के सक्षम प्राधिकारियों के पास होता है। नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई की जिम्मेदारी भी राज्य सरकारों की ही है।
‘एक राष्ट्र, एक नीति’ और नियमों में ढील अंगदान और प्रत्यारोपण को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार ‘राष्ट्रीय अंग प्रत्यारोपण कार्यक्रम’ (NOTP) चला रही है, जिसके तहत देश के विभिन्न क्षेत्रों में क्षेत्रीय (ROTTO) और राज्य स्तरीय (SOTTO) संगठनों की स्थापना की गई है।
इसके साथ ही, सरकार ने “एक राष्ट्र, एक नीति” (One Nation, One Policy) को अपनाते हुए राज्यों के साथ परामर्श प्रक्रिया शुरू की है। इस नई नीति के तहत कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं:
- डोमिसाइल (मूल निवास) की बाध्यता खत्म: अब मृत दाता (deceased donor) से अंग प्राप्त करने के लिए मरीज को अपने ही राज्य का निवासी होना जरूरी नहीं होगा। देश का कोई भी मरीज किसी भी राज्य में जाकर अंग प्रत्यारोपण के लिए अपना पंजीकरण करा सकता है।
- उम्र सीमा का बंधन समाप्त: पहले मृत दाता से अंग प्राप्त करने के लिए पंजीकरण की ऊपरी आयु सीमा 65 वर्ष थी, जिसे अब पूरी तरह हटा दिया गया है। अब किसी भी उम्र का व्यक्ति अंग प्राप्त करने के लिए पंजीकरण करा सकता है।
गरीब मरीजों को ₹15 लाख तक की आर्थिक मदद अंग प्रत्यारोपण को हर वर्ग के लिए सुलभ बनाने के लिए सरकार की ओर से बड़ी वित्तीय राहत की घोषणा की गई है। ‘राष्ट्रीय आरोग्य निधि’ (RAN) के तहत गरीब मरीजों को किडनी, लिवर, हृदय और फेफड़ों के प्रत्यारोपण के लिए ₹15 लाख तक की वित्तीय सहायता दी जा रही है। यही नहीं, ऑपरेशन के बाद के दवाओं के खर्च के लिए मरीजों को ₹10,000 प्रति माह की सहायता भी दी जाती है। इसके अलावा, आयुष्मान भारत (AB PM-JAY) योजना के तहत भी किडनी ट्रांसप्लांट पैकेज को शामिल किया गया है ताकि आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को मुफ्त इलाज मिल सके।
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