लाइकेन की कमी से कैरिबू (Caribou) के समक्ष संकट

संयुक्त राज्य अमेरिका के ‘स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ न्यूयॉर्क कॉलेज ऑफ एनवायरनमेंटल साइंस एंड फॉरेस्ट्री’ के शोधकर्ताओं के एक अध्ययन के अनुसार, यदि आर्कटिक क्षेत्र में लाइकेन (Lichen) की कमी जारी रहती है, तो कैरिबू (Caribou) आबादी के लिए सर्दियों में जीवित रहना मुश्किल हो सकता है।

इस अध्ययन को ‘Winter survival shaped by forage abundance and snow depth for a long-distance migratory ungulate’ शीर्षक के साथ प्रकाशित किया गया है।

अध्ययन के मुख्य बिंदु:

  • लाइकेन पर निर्भरता: कैरिबू (जिन्हें यूरेशिया में ‘रेनडियर’ कहा जाता है) उन गिने-चुने जानवरों में से हैं जो लाइकेन (जिसे ‘रेनडियर मॉस’ भी कहा जाता है) को खा और पचा सकते हैं। सर्दियों में, जब अन्य भोजन की कमी होती है, तो ये पूरी तरह से इसी संसाधन पर निर्भर होते हैं।
  • अध्ययन का आधार: शोधकर्ताओं ने कैरिबू के अस्तित्व के लिए लाइकेन की अनिवार्यता को समझने हेतु ‘वेस्टर्न आर्कटिक हर्ड’ (Western Arctic Herd) के ट्रैकिंग डेटा का विश्लेषण किया।
  • पर्यावास स्थान: कैरिबू स्तनधारी जीव हैं जो यूरोप, उत्तरी अमेरिका, एशिया और ग्रीनलैंड के उत्तरी क्षेत्रों में रहते हैं।

कैरिब्यू का प्रवासन और व्यवहार:

  • सर्दियों का प्रवास: जब बर्फबारी शुरू होती है, तो कैरिबू दक्षिण की ओर अधिक सुरक्षित जलवायु वाले क्षेत्रों में चले जाते हैं जहाँ वे काई या लाइकेन खा सकें। हिरण परिवार के ये सदस्य अपने बड़े खुरों का उपयोग करके भोजन के लिए बर्फ खोदते हैं।
  • गर्मियों का प्रवास: कैरिबू गर्मियों में उत्तर की ओर बढ़ते हैं, जो पृथ्वी पर सबसे बड़े पशु प्रवासों (animal migrations) में से एक है।
  • संरक्षण स्थिति: ‘वुडलैंड कैरिबू’ (Woodland caribou) को लुप्तप्राय (endangered) के रूप में सूचीबद्ध किया गया है, हालांकि कैरिबूकी अन्य आबादी फिलहाल स्थिर है।
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