ग्लोबल पीस इंडेक्स (GPI) 2026
ग्लोबल पीस इंडेक्स (GPI) 2026 को इंस्टीट्यूट फॉर इकोनॉमिक्स एंड पीस (IEP) द्वारा जारी किया गया है। ग्लोबल पीस इंडेक्स शांति का दुनिया का अग्रणी सूचकांक है, जो सामाजिक सुरक्षा, जारी संघर्ष और सैन्यीकरण (militarisation) से संबंधित संकेतकों का उपयोग करके 163 देशों और क्षेत्रों का आकलन करता है।
2026 का ग्लोबल पीस इंडेक्स बताता है कि दुनिया में शांति का स्तर लगातार गिर रहा है, जिसका मुख्य कारण सशस्त्र संघर्ष है। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से अब दुनिया में सबसे अधिक सक्रिय राज्य-आधारित संघर्ष (state-based conflicts) हो रहे हैं, जबकि 2008 के बाद से बाहरी संघर्षों में शामिल देशों की संख्या लगभग दोगुनी हो गई है। सूडान में गृहयुद्ध, यूक्रेन में लंबे समय से चल रहा संघर्ष, और इजरायल, संयुक्त राज्य अमेरिका तथा ईरान के बीच ‘बारह दिवसीय युद्ध’ ने अंतरराष्ट्रीय परिवेश को इंडेक्स के अब तक के इतिहास में सबसे अधिक नाजुक और सैन्यीकृत बना दिया है।
आइसलैंड लगातार 19वें वर्ष दुनिया का सबसे शांतिपूर्ण देश बना हुआ है। यहाँ कोई स्थायी सेना नहीं है, अपराध दर अत्यंत कम है और सामाजिक विश्वास बहुत अधिक है।
2026 में न्यूजीलैंड एक स्थान ऊपर उठकर विश्व स्तर पर दूसरे स्थान पर आ गया है। इसने एशिया-प्रशांत क्षेत्र में किसी भी देश की तुलना में सबसे कम ‘जारी संघर्ष’ स्कोर दर्ज किया है।
भारत ने शांति के स्तर में 2.9 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की है और अब यह विश्व स्तर पर 127वें स्थान पर है। यह गिरावट मुख्य रूप से संघर्ष से संबंधित संकेतकों के बिगड़ने के कारण हुई है। रिपोर्ट में पाकिस्तान और म्यांमार के साथ तनाव बढ़ने और मणिपुर में जारी नृजातीय हिंसा का उल्लेख किया गया है।
भूटान दक्षिण एशिया में सबसे शांतिपूर्ण देश बना हुआ है और 2026 के इंडेक्स में विश्व स्तर पर 16वें स्थान पर है। श्रीलंका 14 स्थान ऊपर चढ़कर 2026 के ग्लोबल पीस इंडेक्स में 67वें स्थान पर आ गया है। यह दक्षिण एशिया में दूसरे स्थान पर है और क्षेत्र में सबसे महत्वपूर्ण सुधारों में से एक है।
2025 में यूक्रेन में चल रहे युद्ध के कारण रूस को दुनिया का सबसे कम शांतिपूर्ण देश माना गया था।


