असम ‘माचा चाय’ का वाणिज्यिक उत्पादन करने वाला देश का पहला राज्य बना

असम के एक चाय बागान ने हाल ही में भारत की पहली व्यावसायिक रूप से उत्पादित ‘माचा चाय’ (Matcha Tea) बेची है, जो पारंपरिक चाय उत्पादन के तौर-तरीकों में एक बड़ा बदलाव है। यह ऐतिहासिक उपलब्धि भारत और जापान के बीच मजबूत संबंधों के कारण संभव हो पाई है। इसके साथ ही असम व्यावसायिक स्तर पर माचा चाय का उत्पादन करने वाला भारत का पहला राज्य बन गया है।

माचा चाय के बारे में

माचा चाय बनाने के लिए कटाई (harvest) से तीन से चार सप्ताह पहले चाय के पौधों (कैनिलिया सिनेंसिस/Camellia sinensis) को छाया में रखा जाता है। चाय उत्पादकों के अनुसार, पत्तियों तक पहुँचने वाली धूप को 90% तक रोकने से उनमें क्लोरोफिल और अमीनो एसिड का स्तर बढ़ जाता है। यही प्रक्रिया इस चाय को एक अनोखा रंग और बेहतरीन स्वाद देती है।

भारत में तेजी से बढ़ते कैफ़े कल्चर के लिए स्थानीय स्तर पर माचा चाय का उत्पादन एक बहुत बड़ा ‘गेम-चेंजर’ साबित होने वाला है। इससे पहले, भारतीय कैफे को पूरी तरह से जापान, चीन या वियतनाम से आने वाले महंगे आयात पर निर्भर रहना पड़ता था।

आम ग्रीन-टी से कितनी अलग है माचा?

आम ग्रीन-टी (नियमित हरी चाय) में पत्तियों को गर्म पानी में भिगोकर छान लिया जाता है और पत्तियों को फेंक दिया जाता है, लेकिन माचा चाय के साथ ऐसा नहीं है। माचा पीते समय आप पूरी की पूरी पत्ती का सेवन करते हैं। इसके गहरे चमकीले हरे रंग और स्वाद को बढ़ाने के लिए पौधों को छाया में उगाया जाता है, और फिर उन पत्तियों को पत्थरों की चक्की में पीसकर एक बेहद बारीक पाउडर तैयार किया जाता है।

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