कोयला मंत्रालय ने बैंक गारंटी के विकल्प के तौर पर इंश्योरेंस श्योरिटी बॉन्ड के उपयोग की मंजूरी दी

केंद्रीय कोयला मंत्रालय ने ‘कोयला ब्लॉक आवंटन (संशोधन) नियम, 2026’ के माध्यम से एक बड़ा बदलाव किया है। इसके तहत खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957 के अधीन आवंटित कोयला ब्लॉकों के लिए अब ‘परफॉर्मेंस बैंक गारंटी’ (PBG) के स्थान पर ‘इंश्योरेंस श्योरिटी बॉन्ड’ (ISB – बीमा जमानत बांड) के उपयोग को मंजूरी दे दी गई है। मंत्रालय ने कहा कि इस संशोधित व्यवस्था से कोयला ब्लॉक आवंटन पाने वाले अपनी परफॉर्मेंस सिक्योरिटी (कार्य-निष्पादन सुरक्षा) संबंधी दायित्वों को पूरा करने के लिए बैंक गारंटी या इंश्योरेंस श्योरिटी बॉन्ड में से किसी भी एक विकल्प को चुन सकते हैं।

इंश्योरेंस श्योरिटी बॉन्ड के बारे में

श्योरिटी बॉन्ड इंश्योरेंस मूल रूप से जोखिम को ट्रांसफर (स्थानांतरित) करने का एक तंत्र है। यह बैंक गारंटी के विकल्प के रूप में काम करता है, जो परियोजना के मालिक (प्रोजेक्ट ओनर) को उस स्थिति में संभावित वित्तीय नुकसान से बचाता है जब ठेकेदार (कॉन्ट्रैक्टर) कॉन्ट्रैक्ट के दायित्वों को पूरा करने में विफल रहता है।

श्योरिटी इंश्योरेंस तीन पक्षों के बीच होने वाले लेन-देन में एक वित्तीय सुरक्षा कवच के रूप में कार्य करता है। इसमें मुख्य रूप से तीन पक्ष शामिल होते हैं:

  • प्रिंसिपल (Principal): जो अक्सर परियोजना का मालिक या लाभार्थी होता है।
  • ठेकेदार (Contractor): जो परियोजना को पूरा करने के लिए जिम्मेदार होता है।
  • जमानत प्रदाता (Surety Provider): जो आमतौर पर एक बीमा कंपनी या बैंक होता है।

यह उत्पाद विशेष रूप से ठेकेदारों द्वारा काम न करने या संविदात्मक चूक (default) की स्थिति में होने वाले वित्तीय नुकसान का बीमा करने के लिए तैयार किया गया है। यह सुनिश्चित करने में मदद करता है कि ठेकेदार उन्हें सौंपी गई परियोजनाओं के दायित्वों को पूरा करें, जिससे लाभार्थी को पूरी वित्तीय सुरक्षा मिलती है।

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