“राजस्थान में मगरमच्छों की मौत के लिए ‘एल्ड्रिन’ कीटनाशक जिम्मेदार”
डाउन टू अर्थ में प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक राजस्थान के कोटा जिले की चंद्रलोई नदी में मगरमच्छों (Crocodylus palustris) की मौत के लिए ‘एल्ड्रिन’ (Aldrin) नामक एक प्रतिबंधित कीटनाशक जिम्मेदार था। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) द्वारा गठित एक संयुक्त समिति ने नदी के पानी में एल्ड्रिन के अंश पाए हैं।
एल्ड्रिन कीटनाशक के बारे में
एल्ड्रिन ‘ऑर्गेनोक्लोरीन’ (organochlorine) समूह का एक कीटनाशक है। भारत सरकार ने इसे प्रतिबंधित कीटनाशकों की सूची में शामिल किया है क्योंकि यह पर्यावरण में लंबे समय तक बना रहता है और मिट्टी व पानी को दूषित करता है।
यह धीरे-धीरे खाद्य श्रृंखला (food chain) में जमा हो जाता है और इंसानों तथा वन्यजीवों के तंत्रिका तंत्र (nervous system) पर गंभीर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है।
इसी कारण से, 1990 के दशक में भारत में इसके निर्माण, आयात और उपयोग पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। इसलिए, नदी के पानी में इसकी उपस्थिति यह सवाल उठाती है कि यह रसायन वहाँ कैसे पहुँचा, यह कितने समय से मौजूद है, और इसके संचय के लिए कौन जिम्मेदार है।
मगरमच्छ (Mugger Crocodile) के बारे में
मगर (Mugger) एक मध्यम आकार का मगरमच्छ है, और क्रोकोडायलस (Crocodylus) प्रजाति के किसी भी अन्य जीवित सदस्य की तुलना में इसका थूथन (snout) सबसे चौड़ा होता है।
यह मुख्य रूप से भारतीय उपमहाद्वीप तक ही सीमित है, जहाँ यह नदियों, झीलों और दलदलों सहित कई ताजे जल के पर्यावासों में पाया जा सकता है।
भारत, पाकिस्तान, श्रीलंका और ईरान में, मगरमच्छों ने जलाशयों, सिंचाई नहरों और मानव निर्मित तालाबों के अनुकूल खुद को अच्छी तरह ढाल लिया है।
यह तटीय खारे पानी के लैगून (lagoons) और मुहानों (estuaries) में भी पाया जा सकता है। मगरमच्छ गड्ढों में घोंसला बनाने वाली (hole-nesting) प्रजाति है, जो वार्षिक शुष्क मौसम (dry season) के दौरान अंडे देती है।
कई अन्य मगरमच्छों की तरह, यह प्रजाति भी बिल खोदने के लिए जानी जाती है।
Sources: DTE & IUCN
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