“राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ग्राम सभाओं में कम भागीदारी” पर रिपोर्ट
नीति आयोग के सदस्य डॉ. आर. बालसुब्रमण्यम द्वारा “राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ग्राम सभाओं में कम भागीदारी” पर एक विस्तृत राष्ट्रीय अध्ययन रिपोर्ट जारी की गई है।
इस रिपोर्ट में उन मुख्य कारणों और बाधाओं का गहराई से विश्लेषण किया गया है, जिनकी वजह से ग्रामीण जनता अपने सबसे बड़े लोकतांत्रिक मंच—’ग्राम सभा’ की बैठकों से दूरी बना रही है। रिपोर्ट के अनुसार, इस कम भागीदारी के पीछे मुख्य रूप से 4 बड़े कारण (Key Barriers) जिम्मेदार हैं:
1. आजीविका का संकट और समय का अभाव (Livelihood & Time Pressures)
ग्रामीण परिवारों के लिए दैनिक जीवन का संघर्ष सबसे बड़ी बाधा है:
- दैनिक मजदूरी और घरेलू काम: रोज कमाना और रोज खाना, साथ ही घर की जिम्मेदारियां लोगों को बैठकों में जाने की अनुमति नहीं देतीं। उनके लिए एक दिन बैठक में जाने का मतलब है एक दिन की दिहाड़ी का नुकसान।
- खेती-किसानी का सीजन: ग्राम सभा की बैठकें अक्सर बुवाई या कटाई के सीजन के दौरान रख दी जाती हैं, जिससे किसान और कृषि मजदूर खेतों को छोड़कर नहीं आ पाते।
- समय का अनुकूल न होना: बैठकों का समय अक्सर ऐसा रखा जाता है जो कामकाजी ग्रामीणों और किसानों की दिनचर्या के साथ मेल नहीं खाता।
2. जागरूकता की कमी और सामाजिक दूरियां (Awareness & Participation)
सूचनाओं के अभाव और सामाजिक रूढ़ियों ने भी भागीदारी को सीमित किया है:
- कम जागरूकता और कमजोर संवाद: ग्रामीणों को ग्राम सभा के महत्व और इसके अधिकारों के बारे में सही जानकारी ही नहीं है। बैठकों की सूचनाएं घरों तक समय पर नहीं पहुंच पातीं।
- सार्वजनिक उदासीनता: लोग बैठकों को तब तक प्रासंगिक नहीं मानते, जब तक कि उन्हें कोई सीधा व्यक्तिगत या वित्तीय लाभ न मिल रहा हो।
- महिलाओं और वंचित वर्गों की उपेक्षा: सामाजिक बंधनों के कारण महिलाओं को बैठकों में जाने के लिए प्रोत्साहित नहीं किया जाता। इसके साथ ही जाति और लिंग के आधार पर होने वाला सामाजिक भेदभाव भी कमजोर वर्गों की भागीदारी के आड़े आता है।
3. प्रशासनिक और संस्थागत कमियां (Governance & Institutional Issues)
पंचायती राज व्यवस्था के भीतर की कमियों ने जनता के भरोसे को कमजोर किया है:
- परिणामों का न दिखना: लोगों को लगता है कि बैठकें महज एक ‘कागजी खानापूर्ति’ या औपचारिकता बनकर रह गई हैं, क्योंकि वहां लिए गए फैसलों का जमीन पर कोई ठोस असर नहीं दिखता।
- पारदर्शिता और भरोसे की कमी: निर्णय लेने की प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं है। इसके अलावा, भ्रष्टाचार की चिंताएं और जनता की शिकायतों का समय पर निपटारा न होना (Poor Grievance Redressal) बड़ी समस्याएं हैं।
- अधिकारियों की अनुपस्थिति और राजनीतिक हस्तक्षेप: बैठकों में सरकारी अधिकारियों की उपस्थिति बेहद कम रहती है, जबकि स्थानीय राजनीति और राजनीतिक हस्तक्षेप का बोलबाला रहता है।
4. बुनियादी ढांचे और पहुंच की समस्या (Accessibility & Infrastructure)
भौगोलिक और भौतिक परिस्थितियां भी ग्रामीणों को बैठकों से दूर रखती हैं:
- दूरी और परिवहन की समस्या: कई ग्रामीण क्षेत्र बेहद दूरदराज और बिखरे हुए हैं। ग्राम पंचायत भवन दूर होने और परिवहन के साधन न होने के कारण लोग पहुंच नहीं पाते।
- बैठने की खराब व्यवस्था: पंचायत भवनों में बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी है। बैठने की पर्याप्त व्यवस्था और शेड न होने के कारण लोग असहज महसूस करते हैं और बैठकों में रुकने से कतराते हैं।
ग्राम सभा के बारे में
- भारत के संविधान के भाग IX के अनुच्छेद 243A के तहत परिकल्पित ग्राम सभा, ग्रामीण भारत में सहभागी लोकतंत्र की नींव है।
- यह ग्राम पंचायत के हर पंजीकृत मतदाता को स्थानीय शासन में भाग लेने, विकास की प्राथमिकताओं पर विचार-विमर्श करने, योजनाओं को मंज़ूरी देने, लाभार्थियों की पहचान करने, सामाजिक जवाबदेही सुनिश्चित करने और विकास कार्यों में समुदाय की भागीदारी व स्वामित्व को मज़बूत करने का सीधा मंच प्रदान करती है।
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