राजस्थान और हरियाणा ने यमुना जल परियोजना के लिए एक महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर किए

राजस्थान और हरियाणा सरकारों ने 29 जून को नई दिल्ली में ‘यमुना जल परियोजना’ (Yamuna Water Project) के निर्माण और कार्यान्वयन के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते के तहत, दोनों राज्यों के बीच दशकों पुराने जल विवाद को सुलझाते हुए पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है।

नए समझौते के प्रावधान

  • प्रतिवर्ष जुलाई से अक्टूबर के महीनों (मानसून अवधि) के दौरान यमुना नहर से राजस्थान को लगभग 580 मिलियन क्यूबिक मीटर (MCM) पानी की आपूर्ति की जाएगी।
  • पानी की यह आपूर्ति तीन बड़ी भूमिगत (अंडरग्राउंड) पाइपलाइनों के माध्यम से की जाएगी।
  • इन तीनों पाइपलाइनों का व्यास (diameter) 3.6 मीटर से अधिक होगा। यह विशाल नेटवर्क न केवल राजस्थान बल्कि हरियाणा के लोगों को भी विश्वसनीय पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करेगा।

1994 के ऐतिहासिक समझौते का क्रियान्वयन

यह परियोजना ‘ऊपरी यमुना बेसिन’ (Upper Yamuna Basin) के उपयोग योग्य सतही जल के बंटवारे पर वर्ष 1994 में हस्ताक्षरित सहमति पत्र (MoU) के तहत राजस्थान को आवंटित जल के हिस्से का प्रभावी ढंग से उपयोग करने में मदद करेगी। इसके तहत ‘पश्चिमी यमुना नहर’ (Western Yamuna Canal) से भूमिगत पाइपलाइन प्रणाली के माध्यम से राजस्थान के आवंटित हिस्से के पानी को पहुँचाने का मार्ग प्रशस्त होगा।

परियोजना का बड़ा प्रभाव:

यह महत्वाकांक्षी परियोजना राजस्थान के शुष्क और अर्ध-शुष्क (arid and semi-arid) क्षेत्रों में रहने वाले लाखों लोगों के लिए जीवनदायिनी साबित होगी। इससे न केवल नियमित पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित होगी, बल्कि इन क्षेत्रों के सामाजिक-आर्थिक विकास को भी बड़ा बढ़ावा मिलेगा।

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