चीन का ‘लाइनशाइन’ TOP500 रैंकिंग में विश्व का सबसे तेज सुपरकंप्यूटर बना

23 जून को घोषित रैंकिंग के नवीनतम संस्करण TOP500 में, चीन के शेनझेन (Shenzhen) स्थित लाइनशाइन (LineShine) कंप्यूटर ने शीर्ष स्थान प्राप्त करके अमेरिकी कंप्यूटर ‘एल कैपिटन’ (El Capitan) को पीछे छोड़ दिया है। इस सूची में चीनी कंप्यूटर की यह पहली उपस्थिति (डेब्यू) थी। साल 2017 के बाद यह पहली बार है जब किसी चीनी कंप्यूटर ने इस सूची में शीर्ष स्थान हासिल किया है। जर्मनी का जुपिटर (Jupiter) सुपरकंप्यूटर फिसलकर पांचवें स्थान पर आ गया है।

सुपरकंप्यूटर विशेष रूप से उन शोधकर्ताओं के लिए उपयोगी होते हैं जो डेटा एकत्र और उसका विश्लेषण करना चाहते हैं, क्योंकि ये बहुत तेजी से जटिल गणनाएं कर सकते हैं। इससे वे दुनिया की कुछ सबसे पेचीदा समस्याओं का समाधान ढूंढ पाते हैं, जैसे कि दवाइयों की खोज (drug discovery), जलवायु और मौसम का पूर्वानुमान, या ब्लैक होल की मॉडलिंग करना।

चीन के नेशनल सुपरकंप्यूटिंग सेंटर में मौजूद ‘लाइनशाइन’ कंप्यूटर ने 2.198 एक्साफ्लॉप्स (exaflops) की गति हासिल की, जिसका अर्थ है कि यह प्रति सेकंड 2 क्विनटिलियन (quintillion – 10 की घात 18) से अधिक गणनाएं कर सकता है। 

कैलिफोर्निया में अमेरिकी सरकार की लॉरेंस लिवरमोर नेशनल लेबोरेटरी में मौजूद ‘एल कैपिटन’ अब दूसरे स्थान पर है, जो टेनेसी और इलिनोइस की राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं में मौजूद दो अन्य अमेरिकी सुपरकंप्यूटरों से आगे है। ये पांचों दुनिया के एकमात्र सार्वजनिक रूप से सत्यापित (verified) एक्सास्केल (exascale) कंप्यूटर हैं।

लाइनशाइन अन्य हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटरों से इस मायने में अलग है कि यह पूरी तरह से पारंपरिक कंप्यूटर चिप्स या सीपीयू (CPUs) पर चलता है, न कि ग्राफिक्स प्रोसेसर या जीपीयू (GPUs) पर, जिनका उपयोग आमतौर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के लिए किया जाता है। TOP500 के अनुसार, इसे संचालित करने के लिए लगभग 42.2 मेगावाट बिजली की आवश्यकता होती है।

इस सूची में भारत के 7 सुपरकंप्यूटर शामिल हैं।

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