फाइबर-ऑप्टिक ड्रोन
दक्षिण लेबनान में जारी लड़ाई ने एक ऐसे कम लागत वाले हथियार पर ध्यान केंद्रित कर दिया है, जिसे हिजबुल्लाह ने इजरायल की उन्नत इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणालियों (electronic warfare systems) के खिलाफ घातक प्रभाव के साथ तैनात किया है: फाइबर-ऑप्टिक ड्रोन (Fibre-optic drones)।
क्या होते हैं फाइबर-ऑप्टिक ड्रोन?
जैसा कि नाम से पता चलता है, फाइबर-ऑप्टिक ड्रोन फाइबर-ऑप्टिक केबलों के माध्यम से अपने ऑपरेटरों से जुड़े होते हैं। ये उच्च गति वाले, अत्यधिक मजबूत और हल्के नेटवर्क केबल होते हैं जो कांच या प्लास्टिक के छोटे धागों (strands) के माध्यम से प्रकाश की तरंगों (pulses) के रूप में डेटा प्रसारित करते हैं।
- बनावट और कार्यप्रणाली: इस पतले केबल को पहले एक रील (spool) पर लपेटा जाता है और ड्रोन से जोड़ने से पहले एक सुरक्षात्मक आवरण (shell) से ढक दिया जाता है। जब ड्रोन उड़ान भरता है, तो केबल खुलना शुरू हो जाता है और यह बिना किसी खास खिंचाव (drag) के उचित गति प्राप्त कर सकता है।
- परिचालन दूरी (रेंज): रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, ड्रोन की सूचना और नियंत्रण इसी पतले तार के माध्यम से प्रबंधित किया जाता है। शुरुआत में इसके जरिए लगभग 5 किमी की कम दूरी तक संचालन संभव था, लेकिन बाद में—कुछ दावों के अनुसार—यह दूरी 20 से 30 किमी तक बढ़ गई।
- रीयल-टाइम डेटा: चूंकि ये केबल उड़ान के दौरान परिचालन डेटा प्रसारित कर सकते हैं, इसलिए ये ड्रोन ऑपरेटर को अपने लक्ष्य और आसपास के वातावरण को रीयल-टाइम (उसी समय) में देखने में सक्षम बनाते हैं।
पारंपरिक ड्रोन की तुलना में क्यों हैं बेहतर?
पारंपरिक ड्रोन रेडियो फ्रीक्वेंसी (RF) सिग्नल उत्सर्जित करते हैं और GPS या रेडियो नियंत्रण के उपयोग के कारण अपनी उपस्थिति (signatures) दर्ज कराते हैं। इस वजह से वे जामिंग (jamming), पहचान और इनकी सटीक स्थिति का पता लगाए जाने का खतरा होता है—इसी समस्या से निपटने के लिए फाइबर-ऑप्टिक ड्रोन एक समाधान के रूप में उभरे हैं।
पहचान की चुनौती: फाइबर-ऑप्टिक ड्रोन का पता लगाने का एकमात्र जरिया उसका ‘राडार क्रॉस-सेक्शन’ (radar cross-section) होता है—यह एक ऐसा पैमाना है जो यह निर्धारित करता है कि कोई वस्तु राडार को कितनी दिखाई देती है। इसके लिए अत्यधिक सक्षम रडार प्रणालियों की आवश्यकता होती है और वर्तमान तकनीकी स्तरों के साथ ऐसा कर पाना बेहद कठिन है।



