बायोपॉलिमर-आधारित ‘स्मार्ट सीड कोटिंग टेक्नोलॉजी’
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के हैदराबाद स्थित भारतीय तिलहन अनुसंधान संस्थान (ICAR-IIOR) ने एक अभिनव बायोपॉलिमर-आधारित ‘स्मार्ट सीड कोटिंग टेक्नोलॉजी’ (Smart Seed Coating Technology) विकसित की है। यह तकनीक बीज की गुणवत्ता, फसल की शुरुआती स्थापना और पर्यावरणीय तनावों के खिलाफ पौधों की प्रतिरोधक क्षमता में उल्लेखनीय सुधार करती है। फसल की उत्पादकता बढ़ाने में बीज की गुणवत्ता सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। ऐसे में, फसल के शुरुआती विकास चरणों के दौरान बीजों के प्रदर्शन को बेहतर बनाना खेती की लागत को कम करने और मुनाफे को बढ़ाने की एक बेहद प्रभावी रणनीति के रूप में उभरा है।
पर्यावरण के अनुकूल सुरक्षा कवच
यह स्मार्ट सीड कोटिंग तकनीक पूरी तरह से बायोडिग्रेडेबल (प्रकृति में आसानी से मिल जाने वाले) बायोपॉलिमर का उपयोग करती है, जो बीजों के चारों ओर एक बहु-कार्यात्मक सुरक्षात्मक परत बनाती है। यह कोटिंग बीज और मिट्टी के संपर्क स्तर (seed-soil interface) पर सीधे सहायता प्रदान करती है। यह परत पौधों के लिए फायदेमंद सूक्ष्मजीवों (microorganisms), पोषक तत्वों, सूक्ष्म पोषक तत्वों (micronutrients), फसल सुरक्षा एजेंटों और पौधों के विकास को बढ़ावा देने वाले यौगिकों को सीधे बीज तक पहुँचाने वाले एक बेहतरीन प्लेटफॉर्म के रूप में काम करती है।
मजबूत जड़ें और तेज अंकुरण
आईसीएआर-आईआईओआर (ICAR-IIOR) के अनुसार, यह तकनीक बीजों के चारों ओर एक अनुकूल सूक्ष्म-वातावरण (microenvironment) तैयार करती है। यह माहौल बीजों के तेजी से अंकुरण, पौधों की मजबूत शुरुआती वृद्धि और जड़ों के बेहतर विकास को बढ़ावा देता है। इसके साथ ही, यह फसल की स्थापना के सबसे महत्वपूर्ण शुरुआती चरण के दौरान जैविक और अजैविक (biotic and abiotic) दोनों प्रकार के तनावों को झेलने की क्षमता भी प्रदान करता है।
देशव्यापी परीक्षणों में सफलता
अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना (AICRP)-सीड के तहत देश के विभिन्न हिस्सों में इस तकनीक के व्यापक परीक्षण किए गए। सोयाबीन, मक्का, मूंगफली, चना, कपास, सरसों और अरहर जैसी प्रमुख फसलों पर किए गए इन बहु-स्थान परीक्षणों में सामने आया कि सामान्य (बिना उपचारित) बीजों की तुलना में इस तकनीक से तैयार बीजों की उत्पादकता में 12 से 37 प्रतिशत तक की भारी वृद्धि दर्ज की गई। इसके अलावा, पौधों की जीवन शक्ति और फसल स्थापना में भी सुधार देखा गया।
हर फसल के लिए उपयोगी और बहुमुखी तकनीक
पारंपरिक बीज उपचार विधियाँ आमतौर पर किसी एक समस्या (जैसे कीट या बीमारी) का ही समाधान करती हैं। इसके विपरीत, आईसीएआर-आईआईओआर का यह अनूठा प्लेटफॉर्म एक ही बीज उपचार में कई सारे फायदेमंद इनपुट को एक साथ जोड़ देता है। इस तकनीक को अनाज, मोटे अनाज (मिलेट्स), दलहन, तिलहन, रेशा फसलों, चारा फसलों, सब्जियों, मसालों और बागवानी फसलों की जरूरत के हिसाब से कस्टमाइज (परिवर्तित) किया जा सकता है। अपनी इसी खूबी के कारण यह देश की विविध कृषि प्रणालियों के लिए बेहद उपयुक्त और क्रांतिकारी साबित हो रही है।


