ग्राउंड-लेवल ओजोन
दिल्ली की वायु प्रदूषण समस्या पारंपरिक रूप से पर्टिकुलेट मैटर (PM₂.₅ और PM₁₀) से जुड़ी रही है, लेकिन हाल के साक्ष्य बताते हैं कि इसके अतिरिक्त, ग्राउंड-लेवल ओजोन (O3) भी तेजी से एक समान रूप से महत्वपूर्ण पर्यावरणीय और सार्वजनिक स्वास्थ्य चिंता के रूप में उभर रही है।
सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (CSE) ने ‘कंटीन्यूअस एंबियंट एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग सिस्टम’ (CAAQMS) के डेटा का उपयोग करते हुए बताया कि दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) के कई इलाकों में 1 मार्च से 31 मई, 2025 के बीच हर दिन 100 µg/m³ का राष्ट्रीय आठ-घंटे का ओजोन मानक पार हो गया।
पार्टिकुलेट मैटर के विपरीत, ओजोन किसी भी स्रोत से सीधे उत्सर्जित नहीं होती है। यह एक द्वितीयक प्रदूषक (सेकेंडरी पोल्यूटेंट) है जो नाइट्रोजन ऑक्साइड (NOx) और मुख्य रूप से ऑटोमोबाइल (वाहनों) के धुएं से उत्पन्न होने वाले वाष्पशील कार्बनिक यौगिकों (VOCs) से जुड़ी फोटोकैमिकल अभिक्रियाओं के माध्यम से बनता है, जो सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में ओजोन उत्पन्न करते हैं। परिणामस्वरूप, ओजोन प्रदूषण गर्म, धूप वाले मौसम में और दिन के समय सबसे गंभीर होता है, तथा जलवायु परिवर्तन से जुड़े बढ़ते तापमान के साथ इसके और बिगड़ने की आशंका है।
ओजोन एक अत्यधिक प्रतिक्रियाशील ऑक्सीडेंट गैस है जो सीधे तौर पर श्वसन मार्ग के उपकला (एयरवे एपिथेलियम) को नुकसान पहुँचाती है। नियंत्रित मानव जोखिम अध्ययनों (कंट्रोल्ड ह्यूमन एक्सपोजर स्टडीज) और महामारी विज्ञान संबंधी जांचों ने लगातार यह साबित किया है कि इसके अल्पकालिक संपर्क (शॉर्ट-टर्म एक्सपोजर) से भी खांसी, गले में जलन, छाती में जकड़न, घरघराहट (wheezing), डिस्पनिया (सांस फूलना) और गहरी सांस लेने के दौरान दर्द हो सकता है। ओजोन श्वसन मार्ग में सूजन पैदा करती है, श्वसन मार्ग की पारगम्यता (परमीएबिलिटी) को बढ़ाती है और म्यूकोसिलीअरी क्लीयरेंस (बलगम साफ करने की क्षमता) को कमजोर करती है। ये तीव्र प्रभाव उन व्यक्तियों में भी लक्षण पैदा कर सकते हैं जिन्हें पहले से कोई श्वसन संबंधी बीमारी नहीं है।
ओजोन के सबसे स्थापित प्रभावों में से एक फेफड़ों की कार्यप्रणाली (लंग फंक्शन) पर इसका प्रतिकूल प्रभाव है। ओजोन की बढ़ी हुई सांद्रता के संपर्क में आने से स्वस्थ व्यक्तियों में भी FEV1-FVC (फेफड़ों की कार्यक्षमता को मापने का एक मानक परीक्षण) और पीक एक्सपायरेटरी फ्लो रेट्स में मापने योग्य गिरावट आ सकती है। ओजोन का जोखिम अस्थमा के बढ़ने (अस्थमा एक्ससबेर्शन्स) से भी दृढ़ता से जुड़ा हुआ है।


