गिग इकोनॉमी के लिए वैश्विक संधि: ILO ने ‘कन्वेंशन संख्या 193’ को अपनाया

12 जून 2026 को जिनेवा में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय श्रम सम्मेलन (ILC) के 114वें सत्र में, अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) ने गिग इकोनॉमी में काम करने वाले श्रमिकों के लिए एक नई वैश्विक संधि को मंजूरी दी है। ‘ILO कन्वेंशन संख्या 193’ (प्लेटफॉर्म इकोनॉमी में सम्मानजनक कार्य) गिग वर्क के लिए बाध्यकारी श्रम मानक निर्धारित करने वाला दुनिया का पहला वैश्विक समझौता है।

कन्वेंशन की मुख्य विशेषताएं

यह संधि उन श्रमिकों की सुरक्षा में मौजूद लंबी खामियों को दूर करने का प्रयास करती है, जिनका कार्य डिजिटल लेबर प्लेटफॉर्म के माध्यम से प्रबंधित किया जाता है। इसके मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:

  • कार्य मानक: यह पारिश्रमिक, सुरक्षा और स्वास्थ्य, सामाजिक सुरक्षा, और ‘एल्गोरिदम प्रबंधन’ (algorithmic management) पर स्पष्ट नियम तय करती है।
  • सही वर्गीकरण: यह श्रमिकों के सही वर्गीकरण (classification) पर जोर देती है, जो यह निर्धारित करने के लिए महत्वपूर्ण है कि उन्हें किन अधिकारों और सुरक्षा की आवश्यकता है।
  • समर्थन: इस संकल्प के पक्ष में 406 वोट पड़े, जबकि 8 विरोध में और 36 सदस्य अनुपस्थित रहे।

गिग इकोनॉमी का बढ़ता प्रभाव

विश्व बैंक के अनुमान के अनुसार, दुनिया भर में लगभग 43.5 करोड़ (435 मिलियन) लोग लेबर प्लेटफॉर्म के माध्यम से अपनी आय अर्जित कर रहे हैं। टैक्सी और फूड डिलीवरी से लेकर केयर वर्क और ऑनलाइन डेटा कार्यों तक, गिग वर्क का दायरा तेजी से बढ़ रहा है।

भारत में स्थिति: ‘सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020’

भारत पहले से ही गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिकों को एक व्यापक सुरक्षा दायरे में लाने के लिए सक्रिय है। भारत की सामाजिक सुरक्षा संहिता (SS Code), 2020 के तहत:

  • परिभाषा: ‘गिग वर्कर’ वह व्यक्ति है जो पारंपरिक नियोक्ता-कर्मचारी संबंध से बाहर कार्य करता है और ऐसे कार्यों से आय अर्जित करता है।
  • एग्रीगेटर का योगदान: एग्रीगेटर्स (कंपनियों) को अपने वार्षिक टर्नओवर का 1% से 2% हिस्सा ‘सामाजिक सुरक्षा कोष’ में जमा करना अनिवार्य है (यह योगदान गिग वर्कर्स को किए गए भुगतान का अधिकतम 5% हो सकता है)।
  • लाभ: गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिक सरकार द्वारा अधिसूचित सामाजिक सुरक्षा लाभों, जैसे दुर्घटना बीमा, स्वास्थ्य और मातृत्व लाभ आदि के पात्र हैं।
error: Content is protected !!