केरल सरकार का ‘सिल्वरलाइन’ प्रोजेक्ट रद्द करने का निर्णय
केरल सरकार ने पिछली वामपंथी सरकार द्वारा प्रस्तावित सेमी-हाई स्पीड रेल प्रोजेक्ट, ‘सिल्वरलाइन’ को डीनोटिफाई (रद्द) करने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री वी. डी. सतीशन ने कहा कि सरकार हाई-स्पीड रेल प्रोजेक्ट के खिलाफ नहीं है, लेकिन सिल्वरलाइन प्रोजेक्ट “पर्यावरणीय आपदा और आर्थिक रूप से अव्यावहारिक” था।
प्रोजेक्ट के बारे में मुख्य जानकारी:
- उद्देश्य: ₹64,000 करोड़ के इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य राज्य की राजधानी तिरुवनंतपुरम और सबसे उत्तरी जिले कासरगोड के बीच यात्रा के समय को 12 घंटे से घटाकर 4 घंटे करना था।
- जरूरत: केरल की भौगोलिक स्थिति और अधिक जनसंख्या घनत्व को देखते हुए, राज्य के लिए एक हाई-स्पीड ट्रांसपोर्ट सिस्टम की लंबे समय से आवश्यकता रही है।
- कार्यान्वयन: यह प्रोजेक्ट ‘केरल रेल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड’ (K-Rail) द्वारा क्रियान्वित किया जाना था। K-Rail, केरल सरकार और भारतीय रेलवे का एक संयुक्त उद्यम (51:49 की साझेदारी) है, जिसे विशेष रूप से केरल में रेलवे बुनियादी ढांचे को विकसित करने के लिए बनाया गया था।
- शुरुआत: 2021 में राज्य कैबिनेट ने इस प्रोजेक्ट को मंजूरी दी थी और ‘केरल इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट फंड बोर्ड’ से ₹2,000 करोड़ का टोकन आवंटन भी किया गया था।
योजना: 530 किलोमीटर लंबी स्टैंडर्ड-गेज लाइन को मौजूदा रेलवे लाइन के समानांतर और ज्यादातर मिट्टी के तटबंधों (earthen embankments) पर बनाने की योजना थी।


