गाज़ा के लिए ‘ग्लोबल सुमुद फ्लोटिला’ और विवाद
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को अपने राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री, इतामार बेन-गवीर की निंदा करनी पड़ी है। दरअसल, बेन-गवीर ने एक वीडियो साझा किया था जिसमें वे ‘ग्लोबल सुमुद फ्लोटिला’ (GSF) के हिरासत में लिए गए फिलिस्तीन समर्थक कार्यकर्ताओं का मजाक उड़ा रहे थे, जिस पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारी आक्रोश पैदा हो गया।
‘ग्लोबल सुमुद फ्लोटिला’ क्या है?
‘सुमुद‘ एक अरबी शब्द है जिसका अर्थ है “अटूट दृढ़ता”। यह एक विरोध प्रदर्शन करने वाला समूह है जो इजरायल द्वारा दशकों से लगाए गए नौसैनिक नाकेबंदी (naval blockade) को चुनौती देते हुए गाज़ा के लोगों तक मानवीय सहायता पहुँचाने की लगातार कोशिश कर रहा है। यह नागरिक समाज के चार समूहों का एक गठबंधन है:
- फ्रीडम फ्लोटिला गठबंधन
- ग्लोबल मूवमेंट टू गाज़ा
- मगरिब सुमुद फ्लोटिला
- समूद नुसंतारा
समूह खुद को आम लोगों का एक वैश्विक आंदोलन बताता है जिसका किसी सरकार या राजनीतिक दल से कोई संबंध नहीं है। इसमें दुनिया भर के डॉक्टर, छात्र, यूनियन वर्कर और नाविक शामिल हैं।
आंदोलन का विस्तार 7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले के बाद जब इजरायल ने फिलिस्तीनी क्षेत्र की घेराबंदी की और सहायता सामग्री के प्रवेश पर कड़ी पाबंदियां लगा दीं, तो इस समूह ने अपने प्रयासों को और तेज़ कर दिया।
- पहली यात्रा: अगस्त 2025 में स्पेन और इटली के बंदरगाहों से 44 देशों के 50 से अधिक जहाजों के साथ इसकी शुरुआत हुई।
- प्रमुख नाम: इनमें कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग भी शामिल थीं, जिन्हें इजरायल ने दो बार हिरासत में लिया—पहली बार जून 2025 में एक छोटे जहाज पर, और दूसरी बार अक्टूबर 2025 में फ्लोटिला को रोके जाने के दौरान।
- नवीनतम प्रयास: समूह ने अपनी हालिया समुद्री यात्राओं को फिलिस्तीन के लिए अब तक का सबसे बड़ा नागरिक समुद्री प्रयास बताया है, जिसमें 70 से अधिक देशों के प्रतिभागी और 70 से अधिक नावें शामिल हैं।


