केंद्र सरकार ने कहा कि ऊपरी गंगा में कोई नया बांध बनाने के पक्ष में नहीं है
20 मई को, केंद्र सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष एक ‘सहमति’ वाला दृष्टिकोण प्रस्तुत किया कि वह गंगा नदी की प्रमुख जलधाराओं—अलकनंदा और भागीरथी—पर नई जलविद्युत परियोजनाओं (HEPs) के पक्ष में नहीं है। नदियों पर बांध बनाने की बहस 2013 की केदारनाथ आपदा के बाद शुरू हुई थी, जिसके कारण सर्वोच्च न्यायालय ने उत्तराखंड में मौजूदा और प्रस्तावित परियोजनाओं की जांच करने का आदेश दिया था और नई जलविद्युत परियोजनाओं के लिए पर्यावरणीय एवं वन संबंधी मंजूरी पर रोक लगा दी थी। सुनवाई के दौरान, उत्तराखंड में हाल ही में हुई आपदाओं, जैसे कि 2021 की ऋषि गंगा बाढ़ और जोशीमठ में अचानक आई बाढ़ और भू-धंसाव (land subsidence) का हवाला इस क्षेत्र की संवेदनशीलता के प्रमाण के रूप में दिया गया।
इस क्षेत्र की समृद्ध जैव विविधता पर विशेष बल दिया गया है। इस क्षेत्र में नंदा देवी राष्ट्रीय उद्यान, फूलों की घाटी (वैली ऑफ फ्लावर्स) राष्ट्रीय उद्यान, गंगोत्री राष्ट्रीय उद्यान, केदारनाथ वन्यजीव अभयारण्य और भागीरथी इको-सेंसिटिव ज़ोन हैं। इको-सेंसिटिव ज़ोन उत्तरकाशी से गौमुख तक के 100 किलोमीटर के दायरे को सुरक्षा प्रदान करता है।
अलकनंदा-भागीरथी बेसिन देश की सबसे बड़ी नदी, ‘गंगा’ का मुख्य जलस्रोत है, जो देश की लगभग आधी आबादी का आधार है। यह बेसिन देश की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान में इस तरह गहराई से बसा हुआ है, जैसा कोई अन्य नदी बेसिन नहीं है। पंच प्रयाग और चार धाम इसी बेसिन में स्थित हैं।
पंच प्रयाग
उत्तराखंड में वे पाँच पवित्र स्थल जहाँ पाँच नदियाँ अलकनंदा नदी में मिलकर अंततः पवित्र गंगा नदी का निर्माण करती हैं, उन्हें ‘पंच प्रयाग’ कहा जाता है। ये हैं:
- विष्णुप्रयाग: अलकनंदा नदी और धौलीगंगा नदी का संगम।
- नंदप्रयाग: अलकनंदा नदी और नंदाकिनी नदी का संगम।
- कर्णप्रयाग: अलकनंदा नदी और पिंडर नदी का संगम।
- रुद्रप्रयाग: अलकनंदा नदी और मंदाकिनी नदी का संगम।
- देवप्रयाग: अलकनंदा नदी और भागीरथी नदी का संगम।


