भारत में बांध प्रबंधन और सुरक्षा: एक विस्तृत अवलोकन
भारत आज वैश्विक स्तर पर सबसे बड़े बांध पोर्टफोलियो में से एक का प्रबंधन करता है। 6,628 निर्दिष्ट बांधों (specified dams) के साथ भारत दुनिया में तीसरे स्थान पर है, जिनमें से 6,545 चालू (operational) हैं और 83 निर्माणाधीन हैं। इन बांधों की कुल जल भंडारण क्षमता लगभग 330 बिलियन क्यूबिक मीटर (अरब घन मीटर) है, जो राष्ट्रीय खाद्य, ऊर्जा और जल सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
बांधों का आयु-वार विश्लेषण (Age Profile)
- 50 वर्ष से अधिक पुराने: लगभग 26% (1,681 बांध) बांध 50 साल से अधिक पुराने हैं। इनमें 291 बांध ऐसे हैं जो 100 साल से भी अधिक पुराने हैं।
- 25 से 50 वर्ष पुराने: लगभग 42% बांध इस आयु वर्ग में आते हैं।
- ऐतिहासिक गौरव: तमिलनाडु में स्थित भारत का सबसे पुराना बांध, कल्लनै (ग्रैंड एनीकट), लगभग 2,000 वर्षों से काम कर रहा है—जो स्थायी इंजीनियरिंग और उत्कृष्ट रखरखाव का एक अनूठा उदाहरण है।
स्वामित्व और क्षेत्रीय वितरण (Ownership & Distribution)
- राज्य सरकारें: लगभग 98.5% (6,448 बांध) बांधों का स्वामित्व राज्य सरकारों के पास है।
- केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (CPSUs): 49 बांध (0.7%)।
- निजी संस्थाएं: 36 बांध (0.6%)।
- केंद्र सरकार: 12 बांध (0.2%)।
सर्वाधिक बांधों वाले राज्य: निर्दिष्ट बांधों की संख्या के मामले में महाराष्ट्र पहले स्थान पर है, जिसके बाद क्रमशः मध्य प्रदेश, गुजरात, छत्तीसगढ़, राजस्थान, कर्नाटक और ओडिशा का स्थान आता है।
भंडारण क्षमता का नुकसान:
केंद्रीय जल आयोग (CWC) के आंकड़ों के अनुसार भारत के 439 जलाशयों के विश्लेषण से पता चलता है कि 42 वर्ष की औसत जलाशय आयु के साथ कुल भंडारण क्षमता में औसतन 19% का नुकसान हुआ है। भंडारण की औसत वार्षिक हानि 0.74% अनुमानित है, जो प्रति वर्ष प्रति जलाशय लगभग 1.81 मिलियन क्यूबिक मीटर (MCM) के बराबर है।
प्रमुख सुरक्षा पहलें और कानूनी ढांचा
1. ड्रिप (DRIP – Dam Rehabilitation and Improvement Project): यह प्रमुख राष्ट्रीय पहल (बांध पुनर्संरचना और सुधार परियोजना) संरचनात्मक मरम्मत, स्पिलवे और गेटों के आधुनिकीकरण तथा उन्नत निगरानी प्रणालियों की स्थापना के माध्यम से मौजूदा बांधों की सुरक्षा और परिचालन प्रदर्शन को बेहतर बनाने के लिए तीन चरणों में लागू की जा रही है। ड्रिप दुनिया के सबसे बड़े बांध पुनर्वास कार्यक्रमों में से एक है, जो बांध सुरक्षा प्रबंधन के प्रति भारत के सुव्यवस्थित और जोखिम-आधारित दृष्टिकोण को दर्शाता है।
2. बांध सुरक्षा अधिनियम, 2021 (Dam Safety Act, 2021): यह अधिनियम 30 दिसंबर 2021 को लागू हुआ और देश भर में निर्दिष्ट बांधों की निगरानी, निरीक्षण, संचालन और रखरखाव के लिए एक व्यापक ढांचा प्रदान करता है।
- निर्दिष्ट बांध (Specified Dam) की परिभाषा: इस अधिनियम के तहत ‘निर्दिष्ट बांध’ का तात्पर्य उस बांध से है जिसकी ऊंचाई 15 मीटर से अधिक हो, या यदि वह निर्धारित तकनीकी मानदंडों को पूरा करता है तो उसकी ऊंचाई 10 से 15 मीटर के बीच हो।
- कानूनी बाध्यता: अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों का पालन करना अब निश्चित समयसीमा के साथ बांध मालिकों का वैधानिक दायित्व (statutory obligation) बन गया है।
चार-स्तरीय संस्थागत तंत्र (Four-Tier Institutional Mechanism)
अधिनियम के तहत सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक चार-स्तरीय ढांचा स्थापित किया गया है:
| स्तर | संस्था | भूमिका और जिम्मेदारी |
| शीर्ष स्तर (केंद्र) | राष्ट्रीय बांध सुरक्षा समिति (NCDS) | नीति निर्माण और देश भर में समान बांध सुरक्षा मानकों के लिए नियम तय करने वाली शीर्ष संस्था। |
| नियामक स्तर (केंद्र) | राष्ट्रीय बांध सुरक्षा प्राधिकरण (NDSA) | नियमों को लागू करने और नियामक संस्था (Regulatory arm) के रूप में कार्य करना। |
| राज्य स्तर (नीति) | राज्य बांध सुरक्षा समिति (SCDS) | राज्य स्तर पर नीतियों और सुरक्षा उपायों की समीक्षा करना। |
| राज्य स्तर (निगरानी) | राज्य बांध सुरक्षा संगठन (SDSO) | राज्य स्तर पर निगरानी, निरीक्षण और अनुपालन के लिए जिम्मेदार। (सभी 31 बांध स्वामित्व वाले राज्यों ने SDSO का गठन कर लिया है)। |
मानसून-पूर्व और मानसून-पश्चात निरीक्षण24 अप्रैल 2024 को अधिसूचित विनियमन (regulation) के अनुसार, बांध मालिकों के लिए सभी निर्दिष्ट बांधों का मानसून-पूर्व (Pre-monsoon) और मानसून-पश्चात (Post-monsoon) निरीक्षण करना अनिवार्य है। इन निरीक्षणों के आधार पर बांधों को उनकी सुरक्षा स्थिति के अनुसार तीन श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाता है।


