UAE भारत के रणनीतिक पेट्रोलियम भंडारों में 30 मिलियन बैरल तेल जमा करेगा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 मई 2026 को संयुक्त अरब अमीरात (UAE) का दौरा किया और यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के साथ चर्चा की। इस यात्रा के दौरान, 15 मई को भारत और यूएई ने कई समझौतों पर हस्ताक्षर किए, जिनमें रणनीतिक रक्षा साझेदारी (strategic defence partnership) के लिए एक रूपरेखा, भारतीय रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार (strategic petroleum reserves) में 30 मिलियन बैरल कच्चे तेल का भंडारण, एलपीजी (LPG) की आपूर्ति और गुजरात के वाडिनार में एक जहाज मरम्मत क्लस्टर (ship repair cluster) की स्थापना शामिल है। यूएई ने भारतीय बुनियादी ढांचे (infrastructure) के साथ-साथ आरबीएल बैंक (RBL Bank) और सम्मान कैपिटल (Samman Capital) में कुल 5 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश का भी संकल्प लिया। संबंधों में आई यह तेजी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चार यूरोपीय देशों के दौरे के दौरान अबू धाबी में उनके संक्षिप्त पड़ाव (stopover) को दर्शाती है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और राजनयिक संबंध

  • शुरुआत: दोनों देशों के बीच औपचारिक राजनयिक संबंध 1972 में स्थापित हुए थे, जिसके बाद अबू धाबी और नई दिल्ली में दूतावास खोले गए।
  • नया मोड़: द्विपक्षीय संबंधों को 2015 में तब नई गति मिली जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूएई का दौरा किया, जो 34 वर्षों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली यूएई यात्रा थी।
  • उच्च स्तरीय दौरे: पीएम मोदी ने 2014 के बाद से सात बार यूएई का दौरा किया है और यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान 5 बार भारत आ चुके हैं।

व्यापार और निवेश

  • रिकॉर्ड व्यापार: दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार पहली बार 100 अरब अमेरिकी डॉलर को पार कर गया, जो वित्तीय वर्ष (FY) 2025-26 में 101.25 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया। दोनों पक्षों ने 2032 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना कर 200 अरब अमेरिकी डॉलर करने का संकल्प लिया है।
  • द्विपक्षीय निवेश संधि: इस द्विपक्षीय रिश्ते में निवेश भी एक महत्वपूर्ण घटक बनकर उभरा है। दोनों देशों ने फरवरी 2024 में द्विपक्षीय निवेश संधि (Bilateral Investment Treaty) पर हस्ताक्षर किए थे, जो 31 अगस्त 2024 से प्रभावी हुई।
  • स्थानीय मुद्रा निपटान (LCS): भारत और यूएई के बीच स्थानीय मुद्रा निपटान प्रणाली लागू है, जो द्विपक्षीय व्यापार और प्रेषण (remittances) को भारतीय रुपये (INR) और यूएई दिर्हाम (AED) में निपटाने की अनुमति देती है। इससे अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता और लेनदेन की लागत कम हुई है।

ऊर्जा क्षेत्र में साझेदारी

वित्तीय वर्ष 2024-25 में, यूएई भारत के लिए:

  • कच्चे तेल (crude oil) का चौथा सबसे बड़ा स्रोत रहा।
  • एलएनजी (LNG) का तीसरा सबसे बड़ा स्रोत रहा।
  • एलपीजी (LPG) का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता रहा।
  • भारत के परिष्कृत पेट्रोलियम उत्पादों (finished petroleum products) के लिए दूसरा सबसे बड़ा निर्यात गंतव्य रहा।

विशेष: वर्तमान में, यूएई भारत के रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व (SPR) कार्यक्रम में भाग लेने वाला एकमात्र देश है।

भारतीय प्रवासी (Diaspora) का महत्व

यूएई में प्रवासी भारतीयों की संख्या सबसे अधिक है। वे यूएई की अर्थव्यवस्था और समाज की रीढ़ हैं, इसलिए उनका कल्याण दोनों देशों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। वैश्विक अर्थव्यवस्था के सामने मौजूद चुनौतियों के बावजूद, यह प्रवासी समुदाय भारत में विदेशी मुद्रा भेजने (remittance) का एक निरंतर स्रोत बना हुआ है, जिसका भारत के विदेशी मुद्रा भंडार (forex reserves) पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

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