सुप्रीम कोर्ट ने ‘शिक्षा के अधिकार अधिनियम’ के तहत स्कूलों में अनिवार्य दाखिले के प्रावधान को बरकरार रखा

उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) ने हाल ही में शिक्षा के अधिकार (RTE) अधिनियम के तहत छात्रों के अनिवार्य प्रवेश को बरकरार रखते हुए इसे एक ‘राष्ट्रीय मिशन’ बताया है। न्यायालय ने कहा कि निजी गैर-सहायता प्राप्त संस्थानों सहित पड़ोस के स्कूल, राज्य सरकार द्वारा आवंटित छात्रों को बिना किसी देरी के प्रवेश देने के लिए कानूनी रूप से बाध्य हैं।

सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने यह टिप्पणी की कि कमजोर और वंचित वर्गों के बच्चों को प्रवेश देने से इनकार करना संविधान के अनुच्छेद 21A के तहत उनके शिक्षा के मौलिक अधिकार का उल्लंघन है। न्यायालय ने इस बात पर जोर दिया कि आरटीई अधिनियम के तहत ऐसे छात्रों के लिए 25 प्रतिशत आरक्षण समाज की सामाजिक संरचना को बदलने और समानता को बढ़ावा देने की क्षमता रखता है। न्यायालय ने आगे कहा कि निशुल्क और अनिवार्य शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए कानून का प्रभावी कार्यान्वयन आवश्यक है।

शीर्ष अदालत ने लखनऊ स्थित एक निजी स्कूल द्वारा दायर अपील को खारिज कर दिया, जिसने आरटीई ढांचे के तहत चयन के बावजूद एक छात्रा को प्रवेश देने से इनकार कर दिया था। उच्च न्यायालय के फैसले को बरकरार रखते हुए, पीठ ने कहा कि स्कूल सरकारी अधिकारियों द्वारा लिए गए पात्रता निर्णयों पर सवाल नहीं उठा सकते या उन्हें बदल नहीं सकते।

न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि एक बार जब राज्य चयनित छात्रों की सूची भेज देता है, तो स्कूलों के पास प्रवेश देने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता है। अदालत ने चेतावनी दी कि इसमें किसी भी प्रकार की बाधा शिक्षा के अधिकार को एक ‘खोखला वादा’ बना देगी। 

शिक्षा का अधिकार (RTE) से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी

  • संवैधानिक प्रावधान: भारत के संविधान में 86वें संशोधन अधिनियम, 2002 के माध्यम से अनुच्छेद 21-A जोड़ा गया। इसके तहत 6 से 14 वर्ष की आयु के सभी बच्चों को निशुल्क और अनिवार्य शिक्षा प्रदान करना मूल अधिकार बन गया।
  • अधिनियम का कार्यान्वयन: अनुच्छेद 21-A की भावना को लागू करने के लिए शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम, 2009 पारित किया गया, जो 1 अप्रैल 2010 से प्रभावी हुआ।

मुख्य उद्देश्य: इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रत्येक बच्चे को एक औपचारिक स्कूल में संतोषजनक और न्यायसंगत गुणवत्ता वाली पूर्णकालिक प्रारंभिक शिक्षा (elementary education) प्राप्त करने का अधिकार हो, जो कुछ आवश्यक मानदंडों और मानकों को पूरा करता हो।

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