मानुका शहद

भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के तहत मानुका शहद (Manuka Honey) और एल्ब्यूमिन के लिए बाजार पहुंच की शर्तों का उल्लेख किया गया है। 

मानुका शहद और कृषि आयात की शर्तें

ताजा समझौते के अनुसार, न्यूजीलैंड से चुनिंदा कृषि उत्पादों का आयात कड़े नियमों के तहत होगा:

  • टैरिफ रेट कोटा (TRQ) प्रणाली: इसका मतलब है कि एक निश्चित मात्रा (कोटा) तक शहद और अन्य उत्पादों पर कम या शून्य शुल्क लगेगा, लेकिन उस सीमा से अधिक आयात पर सामान्य शुल्क लागू होगा।
  • न्यूनतम आयात मूल्य (MIP): यह सुनिश्चित करने के लिए एक ‘बेस प्राइस’ तय किया गया है कि बहुत सस्ता आयात भारतीय बाजार में न आए, जिससे स्थानीय किसानों के हितों की रक्षा हो सके।
  • सुरक्षा उपाय (Safeguards): समझौते में ऐसे प्रावधान हैं जो घरेलू बाजार में किसी भी अचानक उछाल या नुकसान की स्थिति में भारत को सुरक्षा प्रदान करते हैं।

मानुका शहद: एक औषधीय खजाना

मानुका शहद साधारण शहद से काफी अलग और शक्तिशाली माना जाता है। इसकी विशेषताएं नीचे दी गई हैं:

विशेषताविवरण
स्रोतयह मानुका पेड़ (Leptospermum scoparium) के मकरंद से प्राप्त होता है, जो मुख्य रूप से न्यूजीलैंड और पूर्वी ऑस्ट्रेलिया में पाया जाता है।
मुख्य तत्वइसमें मिथाइलग्लायोक्सल (Methylglyoxal – MGO) नामक एक शक्तिशाली एंटी-बैक्टीरियल यौगिक होता है।
MGO का महत्वयह यौगिक मानुका शहद के विशेष ‘हीलिंग’ गुणों के लिए जिम्मेदार है। MGO की इतनी उच्च मात्रा केवल मानुका शहद में ही लगातार पाई जाती है।
पारंपरिक उपयोगसदियों से इसका उपयोग रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity), पाचन, त्वचा की देखभाल और मौखिक स्वास्थ्य (Oral health) के लिए किया जाता रहा है।

स्वास्थ्य लाभ

  • घाव भरने में सहायक: इसके एंटी-बैक्टीरियल गुणों के कारण इसे घावों और जलने पर लगाने से संक्रमण का खतरा कम होता है।
  • पाचन स्वास्थ्य: यह पेट के अल्सर और पाचन संबंधी समस्याओं को दूर करने में मदद कर सकता है।
  • गले की खराश: एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों के कारण यह खांसी और गले की खराश में तुरंत राहत देता है। 

ध्यान दें: न्यूजीलैंड ने इस समझौते के तहत विशेष रूप से अपने मानुका शहद के लिए भारत में जगह बनाई है, जिसे विश्व स्तर पर इसकी शुद्धता और स्वास्थ्य लाभों के लिए ‘सुपरफूड’ माना जाता है।

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