स्टेट ऑफ इंडियाज बैट्स

27 संस्थानों के 34 विशेषज्ञों द्वारा दो साल तक किए गए अध्ययन के बाद ‘स्टेट ऑफ इंडियाज बैट्स’ (State of India’s Bats) रिपोर्ट जारी की गई है। इसे नेचर कंजर्वेशन फाउंडेशन (NCF) और बैट कंजर्वेशन इंटरनेशनल (BCI) ने वर्ल्ड वाइल्डलाइफ फंड (WWF) इंडिया के सहयोग से तैयार किया है। 

भारत में चमगादड़ों की विविधता:

  • कुल प्रजातियां: भारत में चमगादड़ों की 135 प्रजातियां पाई जाती हैं (दो दशक पहले यह संख्या 120 थी)।
  • स्थानिक प्रजातियां (Endemic): इनमें से 16 प्रजातियां केवल भारत में ही पाई जाती हैं। इनमें से चार (सोम्ब्रे बैट, मेघालय थिक-थम्ब्ड बैट, रेनफॉरेस्ट ट्यूब-नोज्ड बैट और पीटर ट्यूब-नोज्ड बैट) विशेष रूप से हिमालय और पूर्वोत्तर क्षेत्र में पाई जाती हैं।
  • डेटा की कमी: 135 में से 35 प्रजातियां ऐसी हैं जिनका पर्याप्त अध्ययन नहीं हुआ है या वे ‘डेटा डेफिसिएंट’ श्रेणी में हैं।

विविधता के हॉटस्पॉट (विविधता वाले क्षेत्र):

रिपोर्ट के अनुसार, कुछ राज्य चमगादड़ों की विविधता के प्रमुख केंद्र हैं:

  • पश्चिम बंगाल: 68 प्रजातियां (शीर्ष स्थान)
  • मेघालय: 66 प्रजातियां
  • उत्तराखंड: 52 प्रजातियां
  • दिल्ली: 15 प्रजातियां
  • न्यूनतम विविधता: पंजाब और हरियाणा में सबसे कम (प्रत्येक में केवल 5 प्रजातियां) विविधता दर्ज की गई है।

संरक्षण और चुनौतियां:

  • खतरे में प्रजातियां: वर्तमान में केवल सात प्रजातियों को ‘खतरे में’ (Threatened) के रूप में वर्गीकृत किया गया है, लेकिन रिपोर्ट ने चेतावनी दी है कि डेटा की कमी के कारण यह संख्या वास्तविकता से कम हो सकती है।
  • शोधकर्ताओं की कमी: पूरे भारत में चमगादड़ समर्पित-शोधकर्ताओं की संख्या 50 से भी कम है।

पर्यावास: रिपोर्ट में यह दिलचस्प तथ्य सामने आया है कि भारत में चमगादड़ों की सबसे बड़ी कॉलोनियां अक्सर मानव निर्मित संरचनाओं, विशेष रूप से ऐतिहासिक स्मारकों में पाई जाती हैं।

Source: HT

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