साकुराजिमा ज्वालामुखी में उद्गार
जापान के सबसे सक्रिय ज्वालामुखियों में से एक, साकुराजिमा (Sakurajima) में 11 अप्रैल को विस्फोट हुआ, जिससे वायुमंडल में राख का विशाल गुबार छा गया। यह विस्फोट क्यूशू द्वीप पर स्थित कागोशिमा प्रान्त में चार महीने की शांति के बाद हुआ।
साकुराजिमा एक स्ट्रैटोवोलकैनो (Stratovolcano) है। यहाँ ज्वालामुखियों के प्रकार और उनकी विशेषताओं का विवरण दिया गया है:
स्ट्रैटोवोलकैनो या मिश्रित ज्वालामुखी (Stratovolcano)
- संरचना: ये खड़ी ढलान वाले और शंक्वाकार (conical) ज्वालामुखी होते हैं। इनका निर्माण चिपचिपे लावा, राख और चट्टानी मलबे की परतों के बारी-बारी से जमा होने से होता है।
- लावा की प्रकृति: इनका लावा विस्कस (गाढ़ा और चिपचिपा) होता है, जो आसानी से नहीं बहता। इस कारण यह ज्वालामुखी के मुख (vent) के आसपास ही जमा होकर खड़ी ढलान बनाता है।
- विस्फोटकता: गाढ़े मैग्मा में गैस के जमा होने के कारण इनमें अत्यधिक विस्फोटक विस्फोट होने की संभावना अधिक होती है।
- चट्टान का प्रकार: एंडेसाइट (Andesite) इन ज्वालामुखियों में पाई जाने वाली सबसे आम चट्टान है।
शील्ड ज्वालामुखी (Shield Volcano)
- संरचना: जब ज्वालामुखी से कम चिपचिपा और पतला लावा निकलता है, तो वह स्रोत से बहुत दूर तक फैल जाता है। इससे कोमल ढलान वाला एक विस्तृत ज्वालामुखी बनता है, जिसे ‘शील्ड ज्वालामुखी’ कहते हैं।
- लावा की प्रकृति: ये मुख्य रूप से तरल, बेसाल्टिक लावा प्रवाह से बनते हैं।
- उदाहरण: हवाई द्वीप के मौना केआ (Mauna Kea) और मौना लोआ (Mauna Loa) इसके प्रमुख उदाहरण हैं। ये दुनिया के सबसे बड़े सक्रिय ज्वालामुखी हैं, जो समुद्र तल से 9 किमी से अधिक ऊंचे हैं।
साकुराजिमा का इतिहास
- सक्रियता: ईस्वी सन 708 में इसके पहले दर्ज विस्फोट के बाद से, साकुराजिमा लगभग निरंतर सक्रिय रहा है।
- विस्फोट का प्रकार: इसके अधिकांश विस्फोट स्ट्रोमबोलियन (Strombolian) प्रकृति के होते हैं, जो मुख्य रूप से ज्वालामुखी के शिखर को प्रभावित करते हैं।


