खान मंत्रालय ने निम्न ग्रेड लौह अयस्क की कीमत संबंधी नियमों में संशोधन किए

भारत सरकार ने 14 अप्रैल को निम्न-श्रेणी (low-grade) के लौह अयस्क के लिए मूल्य निर्धारण मानदंडों को संशोधित करने हेतु नियमों में संशोधन की घोषणा की है। इस कदम का उद्देश्य बर्बादी को रोकना और इन भंडारों के उपयोग को बढ़ाना है ताकि इस्पात उद्योग को निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।

केंद्रीय खान मंत्रालय ने 10 अप्रैल, 2026 को खनिज (परमाणु और हाइड्रोकार्बन ऊर्जा खनिजों के अलावा) रियायत (तीसरा संशोधन) नियम, 2026 अधिसूचित किया है। यह ‘थ्रेशोल्ड वैल्यू’ (देहली मान) से नीचे के हेमेटाइट लौह अयस्क के औसत बिक्री मूल्य (ASP) के प्रकाशन की कार्यप्रणाली प्रदान करता है, जिसमें बैंडेड हेमेटाइट क्वार्टजाइट (BHQ) और बैंडेड हेमेटाइट जैस्पर (BHJ) भी शामिल हैं।

यह कदम निम्न-श्रेणी के संसाधनों को व्यावहारिक उपयोग में लाने की उम्मीद जगाता है, जिससे उच्च-श्रेणी के भंडार की कमी की समस्या दूर होगी और वैज्ञानिक खनन प्रथाओं के माध्यम से खनिज संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा। यह संशोधन 45 प्रतिशत की थ्रेशोल्ड सीमा से कम आयरन (Fe) सामग्री वाले लौह अयस्क, जिसमें BHQ और BHJ शामिल हैं, के मूल्य निर्धारण के लिए एक रूपरेखा प्रदान करता है।

निम्न-श्रेणी के लौह अयस्क

बैंडेड हेमेटाइट क्वार्टजाइट (BHQ) और बैंडेड हेमेटाइट जैस्पर (BHJ) निम्न-श्रेणी की, प्रीकैम्ब्रियन (Precambrian) लौह-युक्त चट्टानें हैं जिन्हें अक्सर निम्न-श्रेणी के अयस्क के रूप में माना जाता है। किसी खनिज का ‘थ्रेशोल्ड वैल्यू’ वह सीमा है जिसके नीचे खनन के बाद प्राप्त सामग्री को कचरे के रूप में फेंक दिया जा सकता है।

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