भारत में डेंगू के टीके ‘Qdenga’ (TAK-003) को मंजूरी

टाकेडा (Takeda) के टेट्रावैलेंट डेंगू टीके, TAK-003 (जिसे ‘Qdenga’ कहा जाता है), को हाल ही में भारतीय औषधि महानियंत्रक (DCGI) के तहत विषय विशेषज्ञ समिति (SEC) से 4 से 60 वर्ष की आयु के व्यक्तियों में उपयोग के लिए मंजूरी मिल गई है।

यह भारत में इस बीमारी के खिलाफ लड़ाई में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है, जो हर साल लाखों संक्रमणों और हजारों लोगों (विशेषकर बच्चों) के अस्पताल में भर्ती होने का कारण बनती है।

Qdenga (TAK-003) की विशेषताएं:

  • प्रकार: यह एक ‘लाइव एटेनुएटेड टेट्रावैलेंट’ टीका है।
  • व्यापक सुरक्षा: यह डेंगू वायरस के सभी चारों सीरोटाइप के खिलाफ सुरक्षा प्रदान करता है।
  • पिछला संक्रमण: इसे इस बात की परवाह किए बिना दिया जा सकता है कि व्यक्ति को पहले डेंगू हुआ है या नहीं।
  • वैश्विक मान्यता: 28,000 से अधिक प्रतिभागियों के साथ बड़े वैश्विक परीक्षणों में इसका मूल्यांकन किया गया है और इसे 40 से अधिक देशों में पहले ही अनुमोदित किया जा चुका है। 

टीके के लाभ:

  1. सुरक्षा रिकॉर्ड: टीके ने बेहतरीन सुरक्षा परिणाम प्रदर्शित किए हैं।
  2. अस्पताल में भर्ती होने से बचाव: सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह गंभीर डेंगू और अस्पताल में भर्ती होने के जोखिम के खिलाफ मजबूत सुरक्षा प्रदान करता है। 

डेंगू की चुनौती और सीरोटाइप:

डेंगू एक मच्छर जनित बीमारी है जिसका प्रसार भारत में हर मौसम के साथ बढ़ रहा है। यह चार निकट से संबंधित लेकिन अलग-अलग वायरस द्वारा फैलता है, जिन्हें सीरोटाइप (DENV-1 से DENV-4) कहा जाता है।

  • प्रतिरक्षा की कमी: एक सीरोटाइप के प्रति प्रतिरक्षा अन्य सीरोटाइप के खिलाफ सुरक्षा की गारंटी नहीं देती है।
  • जोखिम: कुछ मामलों में, एक सीरोटाइप के बाद दूसरे से संक्रमण होने पर बीमारी और भी गंभीर हो सकती है।

टीकाकरण की चुनौती: इसीलिए डेंगू का टीका बनाना चुनौतीपूर्ण है—एक प्रभावी टीके को चारों सीरोटाइप के खिलाफ संतुलित सुरक्षा प्रदान करनी चाहिए।

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