INS अरिदमन-भारत की तीसरी परमाणु-संचालित बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी

भारत ने 3 अप्रैल को अपनी तीसरी परमाणु-संचालित बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी (SSBN), INS अरिदमन को सेवा में शामिल किया। INS अरिदमन के आने के साथ ही, भारत के पास पहली बार समुद्र में तीन परिचालन बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बियां होंगी।

यह स्वदेशी SSBN (शिप सबमर्सिबल बैलिस्टिक न्यूक्लियर) INS अरिहंत और INS अरिघात की तुलना में अधिक लंबी दूरी की परमाणु मिसाइलें ले जाने के लिए डिज़ाइन की गई है, जिन्हें क्रमशः 2016 और 2024 में कमीशन किया गया था।

भारत की परमाणु त्रय (Nuclear Triad) की मजबूती

नवीनतम समावेश भारत की परमाणु त्रय को और मजबूत करेगा। भारत उन देशों के चुनिंदा समूह का हिस्सा है जिनके पास परमाणु त्रय क्षमताएं हैं, जिनमें अमेरिका, रूस, चीन और फ्रांस शामिल हैं।

  • हवा: राफेल, सुखोई-30MKI और मिराज 2000 जैसे लड़ाकू विमान परमाणु हथियार ले जा सकते हैं।
  • जमीन: अग्नि श्रृंखला जैसी मिसाइलें जमीन से लॉन्च की जा सकती हैं।
  • समुद्र: SSBNs के माध्यम से समुद्री प्रहार क्षमता।

रणनीतिक महत्व और ‘द्वितीय प्रहार’ क्षमता

यद्यपि भारत का परमाणु सिद्धांत “नो फर्स्ट यूज” (पहले उपयोग नहीं) की नीति निर्धारित करता है—अर्थात भारत परमाणु हथियारों का उपयोग केवल निवारण और जवाबी कार्रवाई के लिए करने के लिए प्रतिबद्ध है—SSBNs भारत की ‘सेकंड-स्ट्राइक’ (द्वितीय प्रहार) क्षमता की गारंटी देते हैं। यदि कोई दुश्मन भारत के भूमि और वायु ठिकानों पर पहला परमाणु हमला करता है, तो एक SSBN जवाबी परमाणु हमला कर सकता है, जिससे प्रभावी प्रतिरोध स्थापित होता है। 

INS अरिदमन की विशेषताएं

7,000 टन वजनी INS अरिदमन में आठ वर्टिकल लॉन्चिंग सिस्टम ट्यूब होने का विश्वास है—जो इसके पूर्ववर्तियों की तुलना में लगभग दोगुनी है।

  • मिसाइल क्षमता: यह अधिक संख्या में K-15 परमाणु-सक्षम सबमरीन-लॉन्च बैलिस्टिक मिसाइलें (SLBM) ले जा सकती है, जिनकी मारक क्षमता 700 किमी से अधिक है।
  • लंबी दूरी: यह लंबी दूरी की K-4 SLBM भी ले जा सकती है, जो 3,500 किमी दूर स्थित लक्ष्यों को भेद सकती है।

विकास की पृष्ठभूमि

भारत का परमाणु-संचालित पनडुब्बी प्रोजेक्ट तीन दशक से भी पहले शुरू किया गया था, जिसमें निजी फर्मों और रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के साथ रूस की सहायता शामिल थी।

  • INS अरिहंत: 2009 में लॉन्च हुई और 2016 में नौसेना में शामिल हुई। इसने भारत को पहली बार समुद्री प्रहार क्षमता प्रदान की।
  • INS अरिघात: 6,000 टन वजनी इस पनडुब्बी को 2024 में शामिल किया गया।

ये पनडुब्बियां 83 मेगावाट के प्रेशराइज्ड लाइट-वाटर परमाणु रिएक्टरों द्वारा संचालित हैं, जो इन्हें पारंपरिक डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियों की तुलना में बहुत अधिक समय तक जलमग्न और अज्ञात रहने की अनुमति देते हैं।

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