वैज्ञानिकों ने अंगूरों में बीजहीनता के आनुवंशिक आधार को समझा

ज्ञानिकों ने अंगूरों में बीजहीनता (seedlessness) के लिए जिम्मेदार प्रमुख आनुवंशिक और विकासात्मक तंत्रों की पहचान की है। आगरकर अनुसंधान संस्थान (ARI), पुणे द्वारा सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय के सहयोग से किए गए इस अध्ययन में बीजहीन अंगूरों के बनने की प्रक्रिया पर नई रोशनी डाली गई है। यह शोध ‘बीएमसी प्लांट बायोलॉजी’ (BMC Plant Biology) जर्नल में प्रकाशित हुआ है।

शोध के मुख्य निष्कर्ष

  • पराग की विफलता (Pollen Sterility): सूक्ष्म परीक्षण (Microscopic examination) से पता चला कि बीजहीन म्यूटेंट में पराग की संरचना असामान्य थी। इनमें पराग की व्यवहार्यता (viability) बहुत कम थी और पराग कण अंकुरित होने में असमर्थ थे।
  • प्रजनन संबंधी बाधाएं: शोध में पाया गया कि बीजहीन पौधों में मादा प्रजनन संरचनाएं (female reproductive structures) बीज वाले अंगूरों की तुलना में काफी छोटी थीं। इसके कारण निषेचन (fertilisation) की प्रक्रिया बाधित हुई, जिससे बीज रहित फल बने।
  • उपभोक्ता प्राथमिकता: बीजहीन किस्में अपनी पतली त्वचा, मीठे स्वाद और बेहतर बनावट के लिए जानी जाती हैं, जिसके कारण वैश्विक बागवानी उद्योग में इनकी अत्यधिक मांग है।

मुख्य बिंदु

श्रेणीविवरण
संस्थानआगरकर अनुसंधान संस्थान (ARI), पुणे और पुणे विश्वविद्यालय
प्रमुख कारणपराग बांझपन और बाधित निषेचन प्रक्रिया
बीजहीन किस्मेंतरबूज, टमाटर और अंगूर (जैसे टेरमारिना रोसा)
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