‘प्रवासी प्रजातियों के संरक्षण पर कन्वेंशन’ के पक्षकारों की 15वीं बैठक (CMS-COP15)

वन्य जीवों की प्रवासी प्रजातियों के संरक्षण पर कन्वेंशन (CMS) के पक्षकारों के सम्मेलन की 15वीं बैठक (COP15) की मेजबानी ब्राजील सरकार द्वारा 23-29 मार्च 2026 तक कैंपो ग्रांडे में की गई।

मुख्य निर्णय और विकास:

  • नई प्रजातियों को शामिल करना: सदस्य देशों ने 40 अतिरिक्त प्रजातियों या उनकी आबादी को CMS परिशिष्ट (Appendices) I और II में शामिल करने पर सहमति व्यक्त की।
    • परिशिष्ट I: विलुप्त होने के खतरे वाली प्रजातियां।
    • परिशिष्ट II: ऐसी प्रजातियां जिन्हें समन्वित अंतर्राष्ट्रीय कार्रवाई की आवश्यकता है।
    • अब इस 47 साल पुराने कन्वेंशन के तहत 1,200 से अधिक विशिष्ट प्रजातियां शामिल हैं।
  • अमेरिका फ्लाईवेज एटलस (Americas Flyways Atlas): COP15 में एक शक्तिशाली नया ऑनलाइन टूल पेश किया गया, जो अमेरिका में 89 अत्यधिक संवेदनशील प्रवासी पक्षी प्रजातियों की वार्षिक यात्राओं का मानचित्रण करता है। इसे ‘कॉर्नेल लैब ऑफ ऑर्निथोलॉजी’ और CMS द्वारा विकसित किया गया है।
  • एटलस का महत्व: यह एटलस उन महत्वपूर्ण प्रजनन, पड़ाव (stopover) और शीतकालीन स्थलों को चिन्हित करता है जो प्रवासी पक्षियों के लिए आवश्यक हैं।

CMS (बॉन कन्वेंशन) के बारे में:

वन्य जीवों की प्रवासी प्रजातियों के संरक्षण पर कन्वेंशन (CMS), जिसे बॉन कन्वेंशन के रूप में भी जाना जाता है, को 1979 में जर्मनी में अपनाया गया था और यह 1 नवंबर 1983 को लागू हुआ था।

उद्देश्य: संयुक्त राष्ट्र की एक पर्यावरणीय संधि के रूप में, CMS प्रवासी जानवरों और उनके आवासों के संरक्षण और स्थायी उपयोग के लिए एक वैश्विक मंच प्रदान करता है।

कार्यप्रणाली: यह उन राज्यों को एक साथ लाता है जिनसे होकर प्रवासी जानवर गुजरते हैं (जिन्हें Range States कहा जाता है)। यह पूरे प्रवासी मार्ग में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समन्वित संरक्षण उपायों के लिए कानूनी आधार तैयार करता है।

समझौते: इसके समझौते कानूनी रूप से बाध्यकारी संधियों (Agreements) से लेकर कम औपचारिक उपकरणों जैसे ‘समझौता ज्ञापन’ (MoU) तक हो सकते हैं।

भारत और CMS: भारत 1 नवंबर 1983 से CMS का एक पक्षकार (सदस्य) है।

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