OBC में क्रीमी लेयर निर्धारित करने पर सुप्रीम कोर्ट का निर्णय
सुप्रीम कोर्ट ने 11 मार्च को फैसला सुनाते हुए कहा कि अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) में क्रीमी लेयर निर्धारित करने के लिए आय (income) को ही एकमात्र मानदंड नहीं माना जा सकता। साथ ही, अदालत ने सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs) और निजी क्षेत्र के कर्मचारियों की सरकारी क्षेत्र के कर्मचारियों के साथ समानता से जुड़े लंबे समय से लंबित प्रश्न का भी समाधान कर दिया। यह निर्णय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम के उन वरिष्ठ अधिकारियों के बच्चों को आरक्षण के दायरे में शामिल करने की संभावना को बढ़ा सकता है, जिन्हें पहले उनके माता-पिता की ₹8 लाख की वार्षिक आय सीमा से अधिक होने के आधार पर बाहर कर दिया जाता था।
सुप्रीम कोर्ट का मुख्य निर्णय (11 मार्च, 2026)
- आय एकमात्र आधार नहीं: कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ओबीसी के भीतर ‘क्रीमी लेयर’ तय करने के लिए केवल आय (Income) को एकमात्र पैमाना नहीं माना जा सकता।
- समानता का सिद्धांत: लंबे समय से लंबित इस प्रश्न को सुलझा लिया गया है कि PSU और निजी क्षेत्र के कर्मचारियों की तुलना सरकारी क्षेत्र के अधिकारियों (Group A/B) से कैसे की जाए।
- आरक्षण का विस्तार: इस फैसले सेसार्वजनिक क्षेत्र के उन वरिष्ठ अधिकारियों के बच्चों को लाभ मिलने की संभावना है, जिन्हें पहले उनके माता-पिता की ₹8 लाख से अधिक वार्षिक आय के कारण आरक्षण से बाहर रखा गया था।
‘क्रीमी लेयर’ क्या है?
‘क्रीमी लेयर’ शब्द का प्रयोग ओबीसी समुदाय के उन लोगों के लिए किया जाता है जो आर्थिक और सामाजिक रूप से मजबूत हो चुके हैं। इन्हें 27% ओबीसी आरक्षण का लाभ नहीं मिलता है।
क्रीमी लेयर के अंतर्गत आने वाले समूह:
- संवैधानिक पद: राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, सुप्रीम कोर्ट/हाई कोर्ट के जज आदि।
- सरकारी सेवा (Group A/B): अखिल भारतीय, केंद्रीय और राज्य सेवाओं के क्लास-I और क्लास-II अधिकारी।
- सशस्त्र बल: कर्नल और उससे ऊपर के रैंक के अधिकारी (लेफ्टिनेंट कर्नल तक के बच्चे कोटा का लाभ ले सकते हैं)।
- आय सीमा: वर्तमान में, गैर-सरकारी क्षेत्र के लिए यह सीमा ₹8 लाख प्रति वर्ष है (जो 1993 में ₹1 लाख थी)।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
- इंद्रा साहनी केस (1992): इसी ऐतिहासिक मामले के बाद ओबीसी आरक्षण में ‘क्रीमी लेयर’ की अवधारणा पेश की गई थी।
- सितंबर 1993 का ज्ञापन (OM): कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (DoPT) ने पहली बार स्पष्ट किया था कि कौन क्रीमी लेयर में आएगा।
- विवाद का कारण: 2004 के एक स्पष्टीकरण पत्र ने PSU कर्मचारियों और सरकारी अधिकारियों के बीच समानता (Equivalence) को लेकर भ्रम पैदा कर दिया था, जिसे अब 2026 के इस फैसले ने दूर कर दिया है।
प्रभाव का सारांश
| विवरण | प्रावधान |
| वर्तमान आय सीमा | ₹8 लाख प्रति वर्ष (2017 से प्रभावी) |
| नया बदलाव | PSU अधिकारियों के बच्चों के लिए आरक्षण के अवसर बढ़ेंगे। |
| प्राथमिकता | सामाजिक-आर्थिक स्थिति को केवल बैंक बैलेंस से नहीं, बल्कि पद की प्रतिष्ठा से भी तौला जाएगा। |


