LPG आपूर्ति बढ़ाने के लिए केंद्र ने आवश्यक वस्तु अधिनियम लागू किया
इजरायल-अमेरिका द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के कारण उत्पन्न तेल संकट के मद्देनजर, केंद्र सरकार ने 5 मार्च को आवश्यक वस्तु अधिनियम (Essential Commodities Act), 1955 लागू कर दिया है। सरकार ने सभी तेल शोधन कंपनियों (Oil Refining Companies) को तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (LPG) का उत्पादन अधिकतम करने और इसे केवल घरेलू उपभोक्ताओं के लिए उपलब्ध कराने का आदेश दिया है।
इस आदेश के तहत कंपनियों को अन्य पेट्रोकेमिकल उत्पादों के निर्माण के लिए एलपीजी उत्पादन हेतु इस्तेमाल होने वाली प्रोपेन या ब्यूटेन धाराओं (streams) का उपयोग करने से रोक दिया गया है। साथ ही, तेल विपणन कंपनियों (OMCs) को निर्देश दिया गया है कि वे इसकी आपूर्ति केवल घरेलू उपभोक्ताओं को ही करें।
अधिनियम के तहत शक्तियाँ:
यह आदेश आवश्यक वस्तु अधिनियम की धारा 3 और 5 का उपयोग करता है, जो केंद्र सरकार को निम्नलिखित शक्तियाँ प्रदान करती हैं:
- तेल शोधन कंपनियों के उत्पादन स्तर को विनियमित करना।
- तेल विपणन कंपनियों (OMCs) के लिए आपूर्ति की सीमा निर्धारित करना।
आवश्यक वस्तु अधिनियम (ESA), 1955 का संदर्भ:
आवश्यक वस्तु अधिनियम सरकार के लिए एक ऐसा उपकरण रहा है जिसका उपयोग बढ़ती खाद्य कीमतों को नियंत्रित करने, जमाखोरी रोकने और खाद्य सुरक्षा बनाए रखने के लिए किया जाता रहा है।
2020 का संशोधन और उसकी शर्तें:
2020 में, संसद ने इस अधिनियम में संशोधन किया था ताकि अनाज, दलहन, आलू, प्याज, खाद्य तिलहन और तेलों को विनियमित करने की केंद्र की शक्तियों को केवल ‘असाधारण परिस्थितियों’ तक सीमित किया जा सके। इन परिस्थितियों में शामिल हैं:
- युद्ध या अकाल।
- कीमतों में अत्यधिक वृद्धि।
- गंभीर प्रकृति की प्राकृतिक आपदा।
स्टॉक सीमा (Stock Limit) लगाने के नियम:
- बागवानी उत्पाद: खुदरा कीमतों में 100% की वृद्धि होने पर।
- गैर-विनाशकारी खाद्य पदार्थ: खुदरा कीमतों में 50% की वृद्धि होने पर।
हालिया उपयोग:
संशोधन के बावजूद, केंद्र ने तब से अब तक पांच बार इस अधिनियम का सहारा लिया है। अनाज, गेहूं और चीनी के निर्यात पर स्टॉक सीमाएं लगाई गई हैं, जिसके पीछे सरकार ने खाद्य कीमतों पर लगाम लगाने और घरेलू जरूरतों को पूरा करने का तर्क दिया है।
Source: TH


