प्रधान मंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना
2008 में शुरू की गई प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना (PMBJP) का उद्देश्य देश भर में फैले ‘जन औषधि केंद्रों’ (JAKs) के बढ़ते नेटवर्क के माध्यम से काफी कम कीमतों पर गुणवत्ता-सुनिश्चित जेनेरिक दवाएं प्रदान करना है। यह योजना जेनेरिक दवाओं की सामर्थ्य और पहुंच को मजबूत करती है।
योजना की मुख्य विशेषताएं:
- गुणवत्ता आश्वासन: PMBJP के तहत आपूर्ति की जाने वाली दवाएं विशेष रूप से उन निर्माताओं से खरीदी जाती हैं जो विश्व स्वास्थ्य संगठन के ‘गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिसेस’ (WHO-GMP) के मानकों का पालन करते हैं।
- किफायती दरें: इन दवाओं की अधिकतम खुदरा कीमत (MRP) आमतौर पर ब्रांडेड दवाओं की तुलना में 50-80% कम होती है, जिससे ग्रामीण परिवारों के स्वास्थ्य देखभाल खर्च में भारी कमी आती है।
- प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना (PMBJP) का संचालन भारतीय औषधि और चिकित्सा उपकरण ब्यूरो (PMBI) द्वारा किया जाता है। PMBI भारत सरकार के रसायन और उर्वरक मंत्रालय के फार्मास्यूटिकल्स विभाग के तहत स्थापित एक स्वायत्त संस्था (Autonomous Society) है।
केंद्र संचालकों के लिए प्रोत्साहन संरचना:
योजना के तहत जन औषधि केंद्र (PMBJK) चलाने वालों के लिए वित्तीय व्यवहार्यता और परिचालन स्थिरता सुनिश्चित करने हेतु एक संरचित प्रोत्साहन दृष्टिकोण अपनाया गया है:
- व्यापार मार्जिन (Trade Margin): संचालकों को प्रत्येक दवा की MRP (करों को छोड़कर) पर 20% का मार्जिन मिलता है।
- मासिक प्रोत्साहन: वे निर्धारित सीमा तक प्रदर्शन-आधारित मासिक प्रोत्साहन के पात्र होते हैं।
- विशेष प्रोत्साहन: महिलाओं, दिव्यांगजनों, अनुसूचित जाति/जनजाति (SC/ST) के उद्यमियों और आकांक्षी या भौगोलिक रूप से पिछड़े क्षेत्रों में केंद्र खोलने वालों को एकमुश्त विशेष प्रोत्साहन दिया जाता है।
- कुल वित्तीय सहायता: उद्यमियों, फार्मासिस्टों, गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) और धर्मार्थ संगठनों द्वारा संचालित केंद्रों को ₹5.00 लाख तक का प्रोत्साहन मिल सकता है।
- प्रोत्साहन का गणित: यह सहायता मासिक खरीद के 20% के बराबर होती है (अधिकतम ₹20,000 प्रति माह)। यह भुगतान तब तक जारी रहता है जब तक कि ₹5 लाख की कुल सीमा पूरी नहीं हो जाती।


