शरावती पंप स्टोरेज जलविद्युत परियोजना
कर्नाटक उच्च न्यायालय ने शिवमोग्गा और उत्तर कन्नड़ जिलों में प्रस्तावित ₹10,000 करोड़ की ‘शरावती पंप स्टोरेज जलविद्युत परियोजना’ (Sharavathi Pumped Storage Hydroelectric project) को दी गई मंजूरी को चुनौती देने वाली एक जनहित याचिका (PIL) पर केंद्र और राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है।
वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के उल्लंघन का आरोप
याचिकाकर्ताओं ने राज्य वन्यजीव बोर्ड द्वारा जनवरी 2025 में दी गई मंजूरी और राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड (NBWL) की स्थायी समिति द्वारा जून 2025 में दी गई ‘सैद्धांतिक मंजूरी’ की वैधता पर सवाल उठाए हैं। याचिका में तर्क दिया गया है कि यह परियोजना शरावती घाटी लायन-टेल्ड मकाक (Lion-Tailed Macaque) अभयारण्य और उसके पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र (Eco-sensitive Zone) के भीतर स्थित है।
कानूनी आधार और धारा 29 का तर्क
याचिकाकर्ताओं का मुख्य तर्क वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 29 पर आधारित है। उनके अनुसार:
- इस धारा के तहत अभयारण्य के भीतर ऐसी किसी भी गतिविधि पर रोक है जो वन्यजीवों के आवास को नुकसान पहुँचाती हो या नष्ट करती हो।
- परियोजना के लिए दी गई मंजूरी इस कानूनी प्रावधान का उल्लंघन करती है।
अदालत से राहत की मांग
याचिकाकर्ताओं ने अदालत से गुहार लगाई है कि जनवरी और जून 2025 में दी गई इन मंजूरियों को रद्द (Quash) किया जाए। यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि शरावती घाटी दुर्लभ प्रजातियों, विशेष रूप से लुप्तप्राय लायन-टेल्ड मकाक का घर है, और यहाँ बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य से जैव विविधता को गंभीर खतरा हो सकता है।
Source: The Hindu


