लो टेम्परेचर थर्मल डिसैलिनेशन (LTTD)

केंद्रीय पृथ्वी विज्ञान मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने लक्षद्वीप के कवरत्ती में लो टेम्परेचर थर्मल डिसैलिनेशन (LTTD) यानी ‘कम तापमान वाले तापीय विलवणीकरण’ संयंत्र का दौरा किया। उन्होंने इस दौरान द्वीपसमूह के कई द्वीपों को पीने का पानी उपलब्ध कराने वाली विलवणीकरण सुविधाओं के कामकाज की समीक्षा की।

LTTD कार्यक्रम को पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के तहत एक स्वायत्त संस्थान, राष्ट्रीय महासागर प्रौद्योगिकी संस्थान (NIOT) द्वारा कार्यान्वित किया गया है। वर्तमान में लक्षद्वीप के आठ द्वीपों में LTTD तकनीक पर आधारित विलवणीकरण संयंत्र चालू हैं।

तकनीक की कार्यप्रणाली

यह तकनीक समुद्र की सतह के गर्म पानी और लगभग 350 से 400 मीटर की गहराई से निकाले गए ठंडे गहरे पानी के बीच तापमान के अंतर का उपयोग करके समुद्री जल को पीने योग्य पानी में बदल देती है।

  • प्रक्रिया: LTTD प्रणाली के तहत, गर्म समुद्री जल को कम दबाव में तेजी से वाष्पित (Flash-evaporated) किया जाता है।
  • संघनन (Condensation): इस वाष्प को गहरे समुद्र के ठंडे पानी का उपयोग करके संघनित किया जाता है, जिससे रासायनिक एडिटिव्स या उच्च-दबाव वाली झिल्लियों (High-pressure membranes) के उपयोग के बिना पीने योग्य पानी प्राप्त होता है।
  • पर्यावरण अनुकूल: यह प्रक्रिया ‘कंसंट्रेटेड ब्राइन’ (अत्यधिक खारे पानी) के उत्सर्जन से भी बचाती है, जो नाजुक कोरल पारिस्थितिकी तंत्र को प्रभावित कर सकता है।

प्रमुख उपलब्धियाँ

  • लक्षद्वीप में पहला LTTD संयंत्र 2005 में कवरत्ती में चालू किया गया था।
  • इसके शुरुआती सफल प्रयोग के बाद, पिछले कुछ वर्षों में अन्य द्वीपों में भी इसी तरह की सुविधाएँ स्थापित की गई हैं।
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