राजस्थान के मुख्यमंत्री ने माउंट आबू का नाम बदलकर ‘आबू राज’ करने की घोषणा की
हाल ही में, राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ने माउंट आबू का नाम बदलकर ‘आबू राज’ करने की घोषणा की है। पश्चिमी राजस्थान में स्थित राज्य के इस एकमात्र हिल स्टेशन के धार्मिक स्वरूप को ‘संरक्षित’ करने की मांग लंबे समय से की जा रही थी।
यहाँ माउंट आबू (अब आबू राज) से जुड़े महत्वपूर्ण ऐतिहासिक और पौराणिक तथ्य दिए गए हैं:
ऐतिहासिक संदर्भ
ब्रिटिश सैन्य अधिकारी जेम्स टॉड ने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक ‘एनाल्स एंड एंटिक्विटीज ऑफ राजस्थान’ (Annals and Antiquities of Rajasthan) में माउंट आबू को “राजस्थान का ओलंपस” (Olympus of Rajasthan) कहा था।
पौराणिक और प्राचीन महत्व
राज्य सरकार के अनुसार, इस स्थान का उल्लेख पुराणों में मिलता है:
- अर्बुदारण्य: पौराणिक युग में इसे “अर्बुदारण्य” या “अर्बुद का जंगल” कहा जाता था।
- ऋषि वशिष्ठ का आश्रम: पुराणों में इसे ऋषि वशिष्ठ के विश्राम स्थल के रूप में वर्णित किया गया है, जहाँ वे ऋषि विश्वामित्र के साथ विवाद के बाद आए थे।
- नंदी और अर्बुद सर्प: एक लोकप्रिय पौराणिक कथा के अनुसार, ‘अर्बुद’ नामक एक सर्प ने यहाँ भगवान शिव के वाहन नंदी के प्राण बचाए थे। “माउंट आबू” नाम इसी ‘अर्बुद’ नाम का संक्षिप्त रूप है।
प्रमुख मंदिर और धार्मिक स्थल
माउंट आबू कई प्रसिद्ध मंदिरों का घर है:
- गुरु शिखर (Guru Shikhar): यह अरावली पर्वतमाला की सबसे ऊँची चोटी है। यहाँ गुरु दत्तात्रेय का मंदिर स्थित है, जिन्हें पवित्र त्रिदेव (ब्रह्मा, विष्णु और शिव) का अवतार माना जाता है। इस मंदिर का निर्माण 14वीं शताब्दी में बताया जाता है।
- दिलवाड़ा जैन मंदिर (Dilwara Jain Temple): 11वीं और 13वीं शताब्दी के बीच स्थापित ये मंदिर अपनी अद्भुत नक्काशी के लिए प्रसिद्ध हैं और इन्हें दुनिया के बेहतरीन जैन मंदिरों में गिना जाता है।


