UNCLOS-प्रादेशिक समुद्र, EEZ, महाद्वीपीय शेल्फ
अंतरराष्ट्रीय कानून, विशेष रूप से संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि (UNCLOS), 1982 के तहत, समुद्र के विभिन्न क्षेत्रों और वहां देशों के अधिकारों को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है।
यहाँ इस कानून और IRIS डेना घटना से संबंधित कानूनी पहलुओं का हिंदी अनुवाद और विश्लेषण है:
समुद्री क्षेत्रों का वर्गीकरण और संप्रभुता
- प्रादेशिक समुद्र (Territorial Sea):
- प्रत्येक तटीय देश अपने तट (या बेसलाइन) से अधिकतम 12 समुद्री मील (nautical miles) तक प्रादेशिक समुद्र का दावा कर सकता है।
- इस क्षेत्र के समुद्र, उसके ऊपर के हवाई क्षेत्र और समुद्र तल (seabed) पर देश की पूर्ण संप्रभुता होती है।
- यह केवल ‘इनोसेंट पैसेज’ (Right of Innocent Passage) के अधिकार के अधीन है, जो विदेशी जहाजों को गुजरने की अनुमति देता है, बशर्ते वे तटीय देश की सुरक्षा के लिए खतरा न हों।
- अनन्य आर्थिक क्षेत्र (EEZ) और महाद्वीपीय शेल्फ (Continental Shelf):
- EEZ: यह बेसलाइन से अधिकतम 200 समुद्री मील तक फैला होता है।
- Continental Shelf: तकनीकी मानदंडों के आधार पर यह अधिकतम 350 समुद्री मील तक हो सकता है।
- इन क्षेत्रों में देशों की पूर्ण संप्रभुता नहीं होती, बल्कि उन्हें केवल वहां मौजूद जीवित और निर्जीव प्राकृतिक संसाधनों पर ‘संप्रभु अधिकार’ प्राप्त होते हैं।
IRIS डेना घटना का कानूनी विश्लेषण
ईरानी जहाज ‘डेना’ और अमेरिकी पनडुब्बी के बीच हुई इस घटना के कानूनी बिंदु निम्नलिखित हैं:
- स्थान: घटना श्रीलंका के गाले से लगभग 20 समुद्री मील पश्चिम में हुई, जो श्रीलंका के विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र (EEZ) के भीतर आता है।
- नेविगेशन की स्वतंत्रता: UNCLOS के अनुच्छेद 87 के अनुसार, प्रादेशिक समुद्र की बाहरी सीमा (12 मील) के परे सभी देशों को “नौवहन और ओवरफ्लाइट की स्वतंत्रता” (Freedom of Navigation and Overflight) प्राप्त है।
- निष्कर्ष: कानूनी रूप से, ‘डेना’ और अमेरिकी नौसेना की पनडुब्बी दोनों को श्रीलंकाई EEZ से गुजरने के लिए श्रीलंका की अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं थी।
Source: IE


