इच्छामती और जलंगी नदियां

हाल ही में पश्चिम बंगाल सरकार ने इच्छामती और जलंगी नदी घाटियों (river basins) के विकास के लिए जर्मन संघीय उद्यम GIZ और राज्य स्वच्छ गंगा मिशन (SMCG) के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। ऊपरी गंगा डेल्टा में स्थित ये दोनों नदी घाटियाँ वर्तमान में कई कारणों से खतरे में हैं।

ये नदी प्रणालियाँ भारत के पश्चिम बंगाल और पड़ोसी देश बांग्लादेश के बीच महत्वपूर्ण सीमापारीय जलमार्ग (transboundary waterways) हैं। ये सिंचाई, मछली पकड़ने, जैव विविधता और स्थानीय आजीविका के लिए पानी के आवश्यक स्रोत के रूप में कार्य करती हैं। साथ ही, ये सुंदरबन डेल्टा के लिए आवश्यक तलछट (sediments) का भी स्रोत हैं।

प्रमुख नदियाँ और उनकी विशेषताएं:

  • इच्छामती नदी: यह एक सीमापारीय नदी है जो भारत (पश्चिम बंगाल) और बांग्लादेश के बीच 200 किलोमीटर तक बहती है। यह दोनों देशों के बीच सीमा के रूप में कार्य करती है। यह नदी सुंदरबन डेल्टा में गाद (silt) के प्रवाह का एक प्रमुख स्रोत है।
  • जलंगी नदी: यह गंगा की एक वितरिका (distributary) है, जो गंगा की मुख्य धारा से अलग होती है (मुख्य धारा बांग्लादेश में पद्मा के रूप में प्रवेश करती है)। जलंगी नदी मुर्शिदाबाद और नदिया जिलों से होकर बहती है और अंततः पश्चिम बंगाल में गंगा की मुख्य वितरिका भागीरथी-हुगली में मिल जाती है। वर्तमान में यह नदी भी गिरावट का सामना कर रही है।

समझौते के मुख्य उद्देश्य:

  • नदी पुनरुद्धार: जल प्रवाह में सुधार करना और गाद की समस्या को कम करना।
  • पारिस्थितिक संतुलन: सुंदरबन डेल्टा में तलछट के प्रवाह को बनाए रखना ताकि डेल्टा का क्षरण रोका जा सके।
  • आजीविका सुरक्षा: स्थानीय समुदायों के लिए मछली पालन और कृषि हेतु जल की उपलब्धता सुनिश्चित करना।

Source: DTE

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