लोकसभा अध्यक्ष ने संसदीय मैत्री समूह का गठन किया
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा 60 से अधिक देशों के साथ संसदीय मैत्री समूह (Parliamentary Friendship Groups) का गठन भारत के ‘संसदीय कूटनीति’ (Parliamentary Diplomacy) के इतिहास में एक मील का पत्थर है। यह पहल पारंपरिक कूटनीति को जन-प्रतिनिधियों के सीधे संवाद से जोड़ती है।
संसदीय मैत्री समूह विभिन्न राजनीतिक विचारधाराओं वाले सांसदों को एक साझा मंच पर लाते हैं, ताकि वे अन्य देशों के विधायकों के साथ सीधे संपर्क साध सकें।
1. मुख्य उद्देश्य और विचार
- प्रत्यक्ष संवाद: कानून बनाने वाले (सांसद) सीधे अपने विदेशी समकक्षों से बात कर सकते हैं।
- अनुभव साझा करना: विधायी अनुभवों, संसदीय प्रक्रियाओं और सर्वोत्तम प्रथाओं (Best Practices) का आदान-प्रदान करना।
- विश्वास का निर्माण: नियमित जुड़ाव के माध्यम से आपसी समझ बढ़ाना और द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करना।
2. संवाद के प्रमुख क्षेत्र
यह पहल केवल संसदीय प्रक्रियाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके दायरे में निम्नलिखित विषय भी शामिल हैं:
- व्यापार और प्रौद्योगिकी: आर्थिक सहयोग और तकनीकी आदान-प्रदान।
- सामाजिक नीति और संस्कृति: सांस्कृतिक संबंधों को गहरा करना।
- वैश्विक चुनौतियाँ: लोकतंत्र के सामने आने वाली समकालीन चुनौतियों पर चर्चा।
पारंपरिक बनाम संसदीय कूटनीति
| विशेषता | पारंपरिक कूटनीति (Traditional) | संसदीय कूटनीति (Friendship Groups) |
| प्रतिनिधित्व | राजदूत और सरकारी अधिकारी। | निर्वाचित प्रतिनिधि (सांसद)। |
| दृष्टिकोण | आधिकारिक और प्रोटोकॉल आधारित। | अधिक भागीदारीपूर्ण और जन-केंद्रित। |
| माध्यम | आधिकारिक द्विपक्षीय वार्ता। | अध्ययन दौरे, संयुक्त चर्चा और संवाद। |


