काजीरंगा: लुप्तप्राय ‘फिशिंग कैट’ की समृद्ध आबादी का पता चला

अपनी तरह के पहले वैज्ञानिक मूल्यांकन में असम के प्रतिष्ठित काजीरंगा नेशनल पार्क और टाइगर रिजर्व में लुप्तप्राय फिशिंग कैट (Prionailurus viverrinus) की एक फलती-फूलती आबादी पाई गई है।

सर्वेक्षण के मुख्य परिणाम:

  • पहचान: वैज्ञानिकों ने 450 वर्ग किमी से अधिक क्षेत्र में कुल 57 विशिष्ट फिशिंग कैट की पहचान की है।
  • स्थिति: यह आंकड़े टाइगर रिजर्व में व्यापक रूप से वितरित एक स्वस्थ और प्रजनन करने वाली आबादी का संकेत देते हैं।
  • कार्यप्रणाली: काजीरंगा के टाइगर सेल ने ‘फिशिंग कैट प्रोजेक्ट’ की वैज्ञानिक तिआसा आध्या के सहयोग से पिछले ‘अखिल भारतीय बाघ अनुमान’ (AITE) डेटा के कैमरा-ट्रैप चित्रों का विश्लेषण कर यह रिपोर्ट तैयार की।
  • विमोचन: यह रिपोर्ट 22 फरवरी, 2026 को काजीरंगा में ‘फिशिंग कैट दिवस’ समारोह के दौरान जारी की गई।

फिशिंग कैट के बारे में महत्वपूर्ण तथ्य

विशेषताविवरण
विशेषतायह उन दुर्लभ बिल्ली प्रजातियों में से एक है जो जलीय शिकार (Aquatic hunting) के लिए अनुकूलित हैं।
संरक्षण स्थितिवैश्विक स्तर पर इसे Vulnerable श्रेणी में रखा गया है।
कानूनी सुरक्षाभारत में यह वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची-I के तहत संरक्षित है।
खतरेपर्यावास का नुकसान और शिकार मुख्य खतरे हैं। वियतनाम और जावा जैसे क्षेत्रों से यह विलुप्त हो चुकी है।
प्रमुख क्षेत्रदक्षिण एशिया इसका वैश्विक केंद्र है, जहाँ यह मुख्य रूप से मैदानी नदी घाटियों के आर्द्रभूमि (Wetlands) में पाई जाती है।

अनुकूल पर्यावास (Habitat):

फिशिंग कैट के अस्तित्व के लिए जलीय घास के मैदान, उथले बील (गोखुर झीलें), गीले चारागाह और वुडलैंड रिफ्यूजिया (बाढ़ से बचने के लिए सुरक्षित स्थान) सबसे उपयुक्त माने जाते हैं।

Source: DTE

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