सुप्रीम कोर्ट: OCI कार्डधारक को भारत में वकालत की प्रैक्टिस का अधिकार नहीं है
उच्चतम न्यायालय ने एक भारतीय विदेशी नागरिक (Overseas citizen of India: OCI) द्वारा दायर उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें वकालत करने और स्टेट बार काउंसिल की सदस्यता प्राप्त करने के लिए अनिवासी भारतीयों (NRI) के समान व्यवहार की मांग की गई थी।
न्यायालय का मुख्य तर्क:
- नागरिकता अनिवार्य: मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जोयमाल्य बागची की पीठ ने व्यवस्था दी कि OCI का दर्जा कुछ विशेषाधिकार तो देता है, लेकिन यह भारतीय नागरिकता के बराबर नहीं है।
- अधिवक्ता अधिनियम (Advocates Act): ‘अधिवक्ता अधिनियम’ की धारा 24 के तहत राज्य नामावली (State Roll) में नामांकन के लिए भारतीय नागरिक होना एक अनिवार्य शर्त है।
- पारस्परिकता का नियम (Reciprocity): अधिनियम के अनुसार, किसी अन्य देश के नागरिक को वकील के रूप में तभी नामांकित किया जा सकता है, यदि उस देश में भी योग्य भारतीय नागरिकों को वकालत करने की अनुमति दी जाती हो।
OCI बनाम भारतीय नागरिक: अधिकारों का अंतर
न्यायालय ने स्पष्ट किया कि OCI को ‘दोहरी नागरिकता’ (Dual Citizenship) समझना गलत है। OCI और पूर्ण भारतीय नागरिकों के अधिकारों में स्पष्ट अंतर है:
1. वर्जित अधिकार (जो OCI को प्राप्त नहीं हैं):
- राजनीतिक अधिकार: मतदान का अधिकार या चुनाव लड़ना (विधायिका की सदस्यता)।
- संवैधानिक पद: राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति या न्यायिक नियुक्तियों के लिए अपात्र।
- लोक नियोजन: अनुच्छेद 16 के तहत लोक नियोजन (Government Jobs) में अवसर की समानता का अधिकार प्राप्त नहीं है (जब तक केंद्र सरकार विशेष अनुमति न दे)।
- संपत्ति: कृषि भूमि, फार्म हाउस या वृक्षारोपण संपत्तियों (Plantation properties) को खरीदने का अधिकार नहीं है।
2. प्राप्त सुविधाएं (विशेषाधिकार):
- वीजा: भारत आने के लिए मल्टीपल एंट्री, बहुउद्देशीय और आजीवन वीजा।
- NRI के साथ समानता: आर्थिक, वित्तीय और शैक्षिक क्षेत्रों में उपलब्ध सुविधाओं के मामले में सामान्यतः NRI के समकक्ष माना जाता है।
Sources: AIR & MEA


