नेशनल मोनेटाइजेशन पाइपलाइन 2.0: मुख्य बिंदु
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने नई दिल्ली में केंद्रीय मंत्रालयों और सार्वजनिक क्षेत्र की संस्थाओं के लिए परिसंपत्ति मुद्रीकरण (Asset Monetisation) के दूसरे चरण का शुभारंभ किया है।
1. वित्तीय लक्ष्य और समय सीमा
- कुल क्षमता: NMP 2.0 के तहत 5 वर्षों की अवधि (वित्त वर्ष 2025-26 से 2029-30) के लिए कुल 16.72 लाख करोड़ रुपये की मुद्रीकरण क्षमता का अनुमान लगाया गया है।
- निजी निवेश: इसमें 5.8 लाख करोड़ रुपये का निजी क्षेत्र का निवेश भी शामिल है।
- पिछली सफलता: NMP 1.0 के तहत निर्धारित 6 लाख करोड़ रुपये के लक्ष्य का लगभग 90% हिस्सा सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है।
2. मुद्रीकरण का स्वरूप और प्रक्रिया
NMP 2.0 का मूल आधार NMP 1.0 के समान ही रहेगा, जिसमें मुख्य रूप से निम्नलिखित तत्व शामिल होंगे:
- सीमित अवधि के लिए हस्तांतरण: संपत्तियों को एक निश्चित समय के लिए निजी हाथों में सौंपना।
- विनिवेश (Divestment): सूचीबद्ध संस्थाओं (Listed Entities) के कुछ हिस्सों को बेचकर अतिरिक्त पूंजी जुटाना।
- कैश फ्लो का प्रतिभूतिकरण (Securitisation): भविष्य में होने वाली आय को अभी पूंजी के रूप में भुनाना।
- रणनीतिक वाणिज्यिक नीलामी।
3. प्रमुख क्षेत्र (Sectors Included)
इस पाइपलाइन में बुनियादी ढांचे से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण क्षेत्रों को शामिल किया गया है:
- परिवहन: राजमार्ग (MMLP और रोपवे सहित), रेलवे, नागरिक उड्डयन, बंदरगाह।
- ऊर्जा और संसाधन: बिजली, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस, कोयला, खदानें।
- अन्य: दूरसंचार, भंडारण (Warehousing), शहरी बुनियादी ढांचा और पर्यटन।
4. राजस्व का आवंटन (Allocation of Proceeds)
मुद्रीकरण से प्राप्त होने वाली राशि को चार प्रमुख शीर्षों में विभाजित किया जाएगा:
- भारत की संचित निधि (Consolidated Fund of India): सबसे बड़ा हिस्सा यहीं जाएगा।
- प्रत्यक्ष निवेश (निजी)।
- PSU या पोर्ट अथॉरिटी आवंटन।
- राज्य की संचित निधि।


