NGT ने सुआव को आधिकारिक रिकॉर्ड में नदी के रूप में बहाल करने का आदेश दिया
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने उत्तर प्रदेश सरकार को आधिकारिक रिकॉर्ड सुधारने और राजस्व अभिलेखों तथा गजेटियर में सुआव (Suav) की स्थिति को “नाले” से बदलकर पुनः “नदी” के रूप में बहाल करने का निर्देश दिया है।
मामले की मुख्य बातें:
- याचिका का आधार: यह आदेश उस याचिका के बाद आया है जिसमें बलरामपुर जिले में राप्ती नदी की एक प्रमुख सहायक नदी, सुआव को ‘नाला’ के रूप में वर्गीकृत करने को चुनौती दी गई थी।
- ऐतिहासिक साक्ष्य: याचिकाकर्ताओं ने 1906 के प्रकाशन ‘गोंडा: ए गजेटियर’ का हवाला दिया, जिसमें सुआव (तत्कालीन सुवावन) को राप्ती नदी की एक महत्वपूर्ण सहायक नदी बताया गया था। गजेटियर के अनुसार, राप्ती में मिलने वाली केवल दो महत्वपूर्ण सहायक नदियाँ थीं: उत्तरी तट पर बूढ़ी राप्ती और दक्षिणी तट पर सुआव।
- अनुपालन की चेतावनी: अधिकरण ने चेतावनी दी है कि आदेश का पालन न करना राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम, 2010 की धारा 26 के तहत अपराध माना जाएगा।
- प्रवर्तन (Enforcement): NGT का आदेश ‘सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908’ के तहत एक सिविल कोर्ट डिक्री के रूप में लागू करने योग्य है। इसमें कानून के अनुसार दोषियों की गिरफ्तारी और हिरासत जैसे प्रवर्तन उपाय शामिल हो सकते हैं।
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (National Green Tribunal: NGT) के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी
| विशेषता | विवरण |
| स्थापना | 18.10.2010 (NGT अधिनियम, 2010 के तहत) |
| उद्देश्य | पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण से संबंधित मामलों का प्रभावी और त्वरित निपटान। |
| समय सीमा | आवेदनों या अपीलों को फाइल करने के 6 महीने के भीतर निपटाने का प्रयास करना। |
| बैठक स्थल | मुख्य पीठ: नई दिल्ली; अन्य चार स्थान: भोपाल, पुणे, कोलकाता और चेन्नई। |
| कार्यप्रणाली | NGT ‘सिविल प्रक्रिया संहिता’ या ‘भारतीय साक्ष्य अधिनियम’ से बाध्य नहीं है, बल्कि ‘प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों’ (Principles of Natural Justice) द्वारा निर्देशित है। |
| शक्तियाँ | NGT के पास अपने निर्णयों की समीक्षा करने की शक्ति है और यह सिविल कोर्ट की शक्तियों से लैस है। |
| NGT के निर्णयों के खिलाफ | अपील सुप्रीम कोर्ट (90 दिनों के भीतर) और हाई कोर्ट (अनुच्छेद 226) में |
Source: DTE


