गाजा ‘बोर्ड ऑफ पीस’ की पहली बैठक में भारत ‘पर्यवेक्षक’ के रूप में हिस्सा लिया

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा गठित ‘बोर्ड ऑफ पीस’ (Board of Peace) की पहली बैठक 19 फरवरी 2026 को वाशिंगटन में आयोजित की गई, जिसमें मुख्य रूप से गाजा के पुनर्निर्माण पर चर्चा हुई। भारत ने इस बैठक में एक ‘पर्यवेक्षक’ (Observer) के रूप में हिस्सा लिया।

भारत ने राष्ट्रपति ट्रंप की ‘गाजा शांति योजना’ पहल और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के प्रस्ताव 2803 के तहत चल रहे प्रयासों का समर्थन किया है। इस बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व वाशिंगटन डीसी में उप-मिशन प्रमुख नमग्या खंपा ने किया।

‘बोर्ड ऑफ पीस’ की पृष्ठभूमि और विवाद

  • उत्पत्ति: ट्रंप ने पिछले साल सितंबर में इजरायल-गाजा युद्ध को समाप्त करने की अपनी योजना के हिस्से के रूप में इस बोर्ड की घोषणा की थी, जिसे शुरू में संयुक्त राष्ट्र का समर्थन प्राप्त था।
  • विस्तारित जनादेश: अध्यक्ष के रूप में ट्रंप ने अब इसका दायरा बढ़ाकर “वैश्विक संघर्षों का समाधान” कर दिया है। आलोचकों का मानना है कि इससे संयुक्त राष्ट्र (UN) के महत्व में कमी आ सकती है।
  • भारत का रुख: जबकि 27 देशों ने इस बोर्ड की सदस्यता स्वीकार कर ली है, भारत और पश्चिम एवं ग्लोबल साउथ के कई अन्य देशों ने अभी तक ऐसा नहीं किया है। पर्यवेक्षक के रूप में शामिल होना भारत की एक सतर्क कूटनीति को दर्शाता है, ताकि इस विवादास्पद संस्था से जुड़ाव भी बना रहे और हाल ही में अमेरिका के साथ हुए व्यापार समझौते को देखते हुए रिश्तों में दूरी भी न आए।

बोर्ड के सदस्य और प्रमुख भागीदारी

बोर्ड में वर्तमान में 27 सदस्य शामिल हैं, जिनमें पश्चिम एशिया और अन्य क्षेत्रों के प्रमुख देश हैं:

क्षेत्रप्रमुख सदस्य देश
पश्चिम एशियाइजरायल, मिस्र, जॉर्डन, सऊदी अरब, यूएई, कतर, तुर्की और बहरीन।
अन्य सहयोगीअर्जेंटीना, हंगरी, वियतनाम और कंबोडिया।
पड़ोसी देशपाकिस्तान भी इसका सदस्य है; प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने स्वयं इस बैठक में शिरकत की।
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